‘आईएसओ’ मानांकन : 53 अस्पतालों के अधिकारी उदासीन
गोंदिया. अब मशीनीकरण के कारण जानवरों की जगह मशीनों ने ले ली है. लेकिन जिला परिषद का पशुपालन विभाग यह समझाने में जुटा है कि पशुधन कितना महत्वपूर्ण है. जो किसान पिछले साल तक पशु चिकित्सा क्लीनिकों से परेशान थे, अब वहीं किसान एक साल के भीतर ही यहां की सेवाओं से खुश हैं. किसानों को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जिले के 15 श्रेणी 1 पशु चिकित्सालयों को ‘आईएसओ’ प्रमाणपत्र से सम्मानित किया गया है.
गोंदिया जिले के 80 प्रतिशत लोग कृषि पर निर्भर हैं. जो लोग कृषि पर निर्भर हैं वे कृषि के पूरक के रूप में पशुपालन करते हैं. उन जानवरों के संरक्षण के लिए जिला परिषद की प्रणाली के माध्यम से किसानों को मदद की जाती है. लेकिन किसानों को मदद नहीं मिलने के कारण किसानों के जानवर पेचिश और घटसर्पा जैसी कई बीमारियों से पीड़ित हो जाते हैं. इसलिए जानवरों की संख्या दिन-ब-दिन कम होती जा रही है. साथ ही जानवरों को वध के लिए भेजे जाने से उनकी संख्या भी कम हो रही है. इन सभी पहलुओं पर फोकस करते हुए किसानों के पशुओं के संरक्षण के लिए जिले में 72 स्थानों पर खोले गए क्लीनिक अब भी पशुओं को मुकम्मल सेवाएं देने में नाकाम साबित हो रहे हैं. एक वर्ष के लिए जिला परिषद में जिला पशुपालन पदाधिकारी के रूप में शामिल हुए डा. कांतिलाल पटले ने जिले में पशु चिकित्सालयों की स्थिति सुधारने का बीड़ा उठाया है. उन्होंने सभी डाक्टरों का मार्गदर्शन किया और इस बात पर जोर दिया कि वे अपने क्लीनिक को कैसे बेहतर बना सकते हैं. इसके फलस्वरूप जिले के 15 पशु चिकित्सालयों को ‘आईएसओ’ प्रमाणित किया गया है. गोंदिया जिले में 42 श्रेणी 1 पशु चिकित्सालय और 30 श्रेणी 2 पशु चिकित्सालय हैं. इनमें से 15 अस्पताल ‘आईएसओ’ बन गए हैं. जबकि श्रेणी 1 के 27 और श्रेणी 2 के 30 अस्पताल जस के तस पड़े हैं. लेकिन यहां के डाक्टर उन अस्पतालों को बचाने की कोई इच्छा नहीं दिखाते.
ये अस्पताल हैं ‘आईएसओ’
जिन चिकित्सालयों को आईएसओ किया गया है उनमें पांढराबोडी, कारंजा, कामठा, देवरी, आसोली, दासगांव, साखरीटोला, गोरहे, विचारपुर, पुराडा, कडिकसा, कुरहाडी, चोपा, चिरचालबांध और घाटटेमनी शामिल हैं.






