ग्रामसेविका समेत पति एक लाख की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार

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पूर्व सैनिक को पांच एकड़ जमीन दिलाने के प्रस्ताव के लिए मांगे थे 5.50 लाख रुपये; गोंदिया एसीबी की कार्रवाई

गोंदिया : पूर्व सैनिक को शासन की ओर से पांच एकड़ कृषि भूमि दिलाने के लिए ग्राम पंचायत का प्रस्ताव और अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) तैयार करने के बदले सरपंच व सदस्यों के नाम पर 5 लाख 50 हजार रुपये तथा अपने लिए अलग से एक लाख रुपये की रिश्वत मांगने के मामले में गोंदिया के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को ग्रामसेविका समेत उसके पति को एक लाख रुपये लेते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान उषा जयकृष्ण पाटील (42), ग्रामसेविका, मानेगांव, तहसील आमगांव और रमाकांत ज्ञानिराम मोटघरे (54), विषय साधन व्यक्ति, गृह साधन केंद्र, पंचायत समिति सालेकसा के रूप में हुई है। दोनों पति-पत्नी हैं और गोंदिया के छोटा गोंदिया स्थित राधाकृष्ण कॉलोनी में हनुमान मंदिर के पास रहते हैं।

शिकायतकर्ता सेवानिवृत्त सैनिक हैं। उन्होंने पूर्व सैनिक के रूप में शासन से पांच एकड़ कृषि भूमि प्राप्त करने के लिए जिलाधिकारी, गोंदिया के पास प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। इस प्रस्ताव के लिए ग्राम पंचायत का ठराव और एनओसी तैयार कर देने के बदले ग्रामसेविका ने सरपंच व सदस्यों के नाम पर 5 लाख 50 हजार रुपये तथा काम शुरू करने के लिए अपने हिस्से के एक लाख रुपये की मांग की थी।

इस संबंध में शिकायतकर्ता ने 9 अक्टूबर को गोंदिया एसीबी में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर उसी दिन पंचों की उपस्थिति में वॉइस रिकॉर्डर की मदद से रिश्वत मांगने की पुष्टि की गई। जांच में आरोपियों द्वारा काम करवाने के बदले कुल 6 लाख 50 हजार रुपये मांगने की बात सामने आई। आरोपियों ने अपने लिए मांगी गई एक लाख रुपये की राशि 12 या 13 अक्टूबर को अपने घर पर लाने के लिए कहा था। निर्धारित योजना के अनुसार मंगलवार, 13 अक्टूबर को एसीबी ने जाल बिछाया। शिकायतकर्ता को पंचों और वॉइस रिकॉर्डर के साथ रिश्वत की राशि लेकर आरोपियों के गोंदिया स्थित घर भेजा गया। इस दौरान आरोपी ग्रामसेविका उषा पाटील के इशारे पर उनके पति रमाकांत मोटघरे ने शिकायतकर्ता से एक लाख रुपये स्वीकार किए। इसके बाद एसीबी की टीम ने दोनों आरोपियों को रंगेहाथ पकड़ लिया।

इस मामले में दोनों आरोपियों के खिलाफ गोंदिया शहर पुलिस थाने में अपराध क्रमांक 844/2026 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 12 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। कार्रवाई रिपोर्ट के अनुसार, मामला दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया जाना था। रिपोर्ट में दोनों आरोपियों के पुलिस हिरासत में होने का उल्लेख है। यह कार्रवाई पुलिस निरीक्षक अरविंद राऊत के नेतृत्व में की गई। पुलिस उपअधीक्षक निलेश लोधी ने कार्रवाई का पर्यवेक्षण किया। पुलिस निरीक्षक उमाकांत उगले सहित एसीबी के अधिकारी और कर्मचारी इस अभियान में शामिल थे।

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