Tuesday, May 21, 2024
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दो गिरफ्तार: नागपुर _पुलिस कर रही थी गांजे की सप्लाई

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  सेंट्रल जेल एक बार फिर चर्चा में है। जेल में कैदियों को गांजा उपलब्ध कराने वाले पुलिसकर्मियों के ‘गांजा रैकेट’ का भांडाफोड़ हुआ है। इस मामले में धंतोली थाने में मामला दर्ज कर जेल के दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार कर्मचारियों का नाम अजिंक्य राठोड और प्रशांत राठोड है। जेल में वाट्सएप के माध्यम से मांग के अनुसार गांजा, ड्रग्स, मोबाइल, कोल्ड ड्रिंक्स, खर्रा, सिगरेट आदि वस्तुएं उपलब्ध कराई जाती थीं। इसके बदले में कैदियों से अच्छी-खासी रकम वसूली जाती थी। पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने यह जानकारी दी है।

गुप्त सूचना मिली थी : पुलिस आयुक्त को गुप्त सूचना मिली थी कि जेल के अंदर कैदियों के पास सिमकार्ड मौजूद हैं, जिसके माध्यम से वाट्सएप के जरिए जेल के अंदर कई प्रकार की वस्तुएं मंगाकर दी जा रही हैं। पुलिस आयुक्त ने गुप्त सूचना मिलने पर मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने अपराध शाखा पुलिस को इस मामले की छानबीन करने का आदेश दिया। अपराध शाखा पुलिस ने जेल में ‘गांजा रैकेट’ के मामले में जेल के उक्त दो कर्मचारियों सहित 5 आरोपियों पर धंतोली थाने में मामला दर्ज किया है। दो कर्मचारी गिरफ्तार कर लिए गए हैं, जबकि अन्य आरोपियों को पुलिस जल्द ही गिरफ्तार करेगी।

रेट निर्धारित हैं : पुलिस आयुक्त के आदेश पर गत माह सेंट्रल जेल में सर्च ऑपरेशन किया गया था। उस समय कुछ नहीं मिला था। इससे जेल में कैदियों को गांजा, मोबाइल, सिमकार्ड और अन्य वस्तुएं उपलब्ध कराने वाला रैकेट तैयार हो गया। इसमें जेल के उक्त दो कर्मचारी शामिल हो गए थे। इसके बदले में वे कैदियों से पैसे लेते थे। पुलिस आयुक्त के अनुसार जेल में प्रत्येक वस्तु के अलग-अलग रेट तय थे। 10 ग्राम गांजा के लिए करीब 5 हजार रुपए और 100 रुपए में प्रति मिनट कॉल, उसी तरह सिगरेट और खानपान की अन्य वस्तुओं के लिए 5 से 10 हजार रुपए लिए जाते थे। इसकी बंदरबांट कैसे होती थी। इसकी छानबीन शुरू है।

पानठेले से होती थी व्यवस्था : कैदी श्रीकांत थोरात, गोपाल पराते आैर राहुल मेंढेकर ने कारागृह से गांजा और कुछ अन्य वस्तुओं की चिट्ठी एक जेल पुलिस कर्मचारी प्रशांत राठोड के पास दी थी। यह चिट्ठी वाट्सएप पर कारागृह के बाहर तैनात जेल पुलिसकर्मी अजिंक्य राठोड को दी गई। यह मैसेज बाहर पानठेले पर पहुंच जाता और वहां से गांजा की व्यवस्था की जाती थी। राठोड व अन्य पुलिसकर्मियों की मदद से गांजा कैदियों तक पहुंचाया करता था। मंगलवार को पुलिस आयुक्त को जेल में पुलिसकर्मी ही गांजा रैकेट चला रहे हैं, जानकारी मिली, तो उन्होंने कार्रवाई का आदेश दिया। दस्ते ने जाल बिछाकर जेल के उक्त दोनों पुलिसकर्मियों को धरदबोचा। दोनों पुलिसकर्मियों के मोबाइल, सिमकार्ड और अन्य वस्तुएं जब्त कर ली गई हैं।

धमकी भरा पत्र भेजा : पुलिस आयुक्त ने बताया कि जेल में बंद आरोपी निषेध वासनिक और वैभव तांडेकर ने गवाहदार को धमकी भरा पत्र भेजा है। कहा है कि अगर गवाहदार मैनेज नहीं होता है, तो उसे देख लिया जाएगा। वासनिक पर हजारों निवेशकों से करीब 40 करोड़ की क्रिप्टो करेंसी के नाम पर ठगी करने का आरोप है। मामले में निषेध की पत्नी प्रगति, दोस्त गजानन मुनमुगने और संदेश लांजेवार को आर्थिक अपराध शाखा पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

शातिर अपराधियों तक पहुंचती हैं वस्तुएं : जेल के उक्त दोनों पुलिसकर्मी जिन कैदियों तक गांजा व अन्य वस्तुएं पहुंचाया करते थे, वे शातिर अपराधी हैं। उन पर मकोका व एमपीडीए की कार्रवाई हुई है। पुलिस आयुक्त ने कहा कि यह बड़े ही दु:ख की बात है कि इसके पहले जेल में कार्रवाई हुई थी। उसके बाद भी जेल में इस तरह की गतिविधियां हो रही हैं। जेल में जो सिमकार्ड ऑपरेट हो रहा है, उसका मंगलवार को दोपहर में कॉलर चेक करने पर पता चला कि उस नंबर के वाट्सएप का उपयोग पुलिस ही कर रही है। यह सिमकार्ड जेल पुलिस के पास है, फिलहाल उसकी खोजबीन हो रही है।

हर माह दे रहे किराया, घर मालिक का अता-पता नहीं
क्या है मामला : रविनगर शासकीय वसाहत की इमारतें पुराने होने से इसे मरम्मत के लिए खाली कराया गया है। नई वसाहत के निर्माण के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार को दिया गया है। ऐसे में इन खाली इमारतों में वर्ष भर से किराएदार किसने रखा व किराया किसकी जेब में जा रहा है, यह सवाल बना है। रविनगर शासकीय वसाहत की देखभाल व दुरुस्ती की जवाबदारी सार्वजनिक निर्माण कार्य उपविभाग क्रमांक 4 की है। बताया गया है कि वसाहत में 40 परिवार अवैध तरीके से रह रहे हैं। वे किराएदार होने का दावा कर रहे हैं। यह भी बताया जा रहा है कि एक मध्यस्थ के माध्यम से किराया वसूला जा रहा है।

अधिकारी या मंत्री का पत्र जरूरी : रविनगर वसाहत में घर पाने के लिए शासकीय अधिकारी, कर्मचारी को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। सार्वजनिक निर्माण कार्य विभाग के अधिकारियों से अनुमति लेनी पड़ती है। मदद के लिए बड़े अधिकारी या मंत्री के पत्र लेने पड़ते हैं। रविनगर वसाहत परिसर में ही 160 क्वार्टर हैं। अधिवेशन के समय इन क्वार्टर्स को खाली करना पड़ता है। एक ओर कर्मचारियों को घर नहीं मिलता है, दूसरी आेर कर्मचारियों के घर में अन्य लोग किराए से रहते हैं। अवैध किरायेदार के संबंध में जानकारी के लिए सार्वजनिक निर्माण कार्य उप विभाग-4 के अभियंता लक्ष्मीकांत राऊलकर से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।

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