Wednesday, May 22, 2024
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फुलचूर के शिवालयों में रमा मन

तालाब के बीच में शिवधाम की स्थापना : लगी भक्तों की कतार
गोंदिया. गोंदिया-गोरेगांव राष्ट्रीय महामार्ग पर फुलचूर में तालाब के बीच में स्थापित मंदिर शिवधाम को सरकार ने ‘क’ दर्जा दिया है और भक्त मंदिर के सुंदर स्वरूप को देखकर मंत्रमुग्ध होने की भावना व्यक्त कर रहे हैं. यह मंदिर पिछले 8 वर्षों से स्थापित है. वैसे तो महाशिवरात्रि, मकर संक्रांति और श्रावण मास में यहां भक्तों की कतारें लगी रहती हैं, लेकिन पर्यटन की दृष्टि से इस शिवधाम में हर दिन पर्यटकों का मेला देखा जा सकता है.
गोंदिया शहर से कुछ ही दूरी पर फुलचूर और फुलचुरटोला के बीच एक पुराना तालाब है. पूर्वजों के अनुसार ब्रिटिश काल में इस तालाब में दो हाथियों को दफनाया गया था. तब से मछुआरे इस स्थान पर पूजा करते थे, परिणामस्वरूप गांव के अन्य भक्त भी इस तालाब में पूजा करने आते थे. इसी बीच पूर्व जिप सदस्य राजेश चतुर ने इस पर ध्यान दिया और हाथियों की उस जगह पर शिवधाम की स्थापना की, जहां ब्रिटिश काल में अंतिम संस्कार किया जाता था. उल्लेखनीय यह है कि इसी मकसद से उन्होंने साल 2015 में शिवलिंग की स्थापना की और बिना किसी से कोई चंदा लिए अपने खर्च पर मंदिर का निर्माण कराया. इसी बीच उन्होंने इस स्थान को पर्यटन स्थल बनाने का प्रयास किया. तालाब के बीच में एक मंदिर बनाया गया और मंदिर तक जाने के लिए एक पुल बनाया गया. नौकायन की सुविधा प्रदान करके पड़ोसी क्षेत्र में एक पार्क बनाया गया. पर्यटकों की दृष्टि से शॉपिंग मॉल आदि सामग्री की दुकानों के लिए प्रयास किए गए. इस बीच 2018 में शिवधाम को सरकार द्वारा पर्यटन स्थल के रूप में ‘क’ दर्जा दिया गया और इस शिवधाम का स्वरूप बदल गया. आज इस स्थान पर शिवधाम पर्यटन महामंडल की स्थापना हो चुकी है और हर साल महाशिवरात्रि और मकर संक्रांति पर यात्रा होती है. श्रावण माह में श्रावण सोमवार के अवसर पर गोंदिया तहसरील और गोरेगांव तहसील से भी भक्त इस स्थान पर आते हैं और ‘हर हर महादेव’ का जाप करते हैं. उल्लेखनीय यह है कि यह जगह एक धार्मिक स्थल होने के साथ-साथ पर्यटन स्थल के रूप में भी देखी जाती है. इसलिए देखा जाता है कि यहां हर दिन पर्यटकों का तांता लगा रहता है. यहां के पुजारी का कहना है कि छुट्टियों के दिन यहां पर्यटकों की भीड़ रहती है.

कर्ता तो प्रभु ही है
ब्रिटिश काल के दौरान इस तालाब में दो हाथियों का अंतिम संस्कार किया गया था. इसलिए जहां उन्हें मिट्टी दी गई, वहां एक द्वीप जैसा क्षेत्र था. जब पुराने लोग वहां पूजा करते थे तो वहां एक मंदिर स्थापित करने और तालाब का सौंदर्यीकरण करने का विचार आया और यह सब मेरे हाथों से हुआ. हमने कुछ नहीं किया, कर्ता तो प्रभु ही है. इसलिए आज जिले के लाखों श्रद्धालु यहां आकर भगवान महादेव के दर्शन करते हैं और पंचाक्षर मंत्र ‘ओम नम: शिव’ का जाप करते हैं.

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