डिजिटल भारत की जरूरतों के अनुसार कानून में बदलाव जरूरी : सांसद राजेंद्र जैन, बैंकर्स बुक्स एविडेंस विधेयक को राष्ट्रवादी कांग्रेस का समर्थन

0
78

गोंदिया. राज्यसभा में ‘बैंकर्स बुक्स एविडेंस विधेयक, 2026’ पर हुई चर्चा के दौरान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की ओर से महाराष्ट्र के सांसद राजेंद्र जैन ने विधेयक का पुरजोर समर्थन किया. उन्होंने कहा कि 1881 में बनाया गया कानून आज के डिजिटल भारत और आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है. इसलिए समय के साथ कानून में बदलाव करना जरूरी है. सांसद जैन ने अपने संबोधन में कहा कि 1881 में जब मूल कानून बनाया गया था, तब कंप्यूटर, इंटरनेट, मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल हस्ताक्षर जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं. आज भारत डिजिटल लेन-देन के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी है. उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में 221.67 अरब से अधिक खुदरा डिजिटल लेन-देन हुए, जिनमें UPI की हिस्सेदारी करीब 81 प्रतिशत रही. यह भारत की डिजिटल प्रगति का प्रमाण है.

बैंक अधिकारियों और ग्राहकों का समय बचेगा
जैन ने कहा कि नए विधेयक से न्यायिक प्रक्रिया सरल होगी और बैंक अधिकारियों को बार-बार अदालतों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी. इससे बैंक कर्मचारियों के साथ ही ग्राहकों का भी महत्वपूर्ण समय बचेगा. इस समय का उपयोग मुद्रा लोन, पीएम रोजगार योजना और कृषि अवसंरचना निधि (AIF) जैसी सरकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में किया जा सकेगा.

ग्रामीण सहकारी बैंकों को मजबूत करने पर जोर
सांसद राजेंद्र जैन ने ग्रामीण क्षेत्रों की सहकारी बैंकों के आधुनिकीकरण और उन्हें मजबूत बनाने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि यह विधेयक केवल बैंक रिकॉर्ड से संबंधित नहीं है, बल्कि डिजिटल भारत, पारदर्शी न्याय व्यवस्था और आधुनिक आर्थिक प्रणाली को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने सदन से विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने का आग्रह करते हुए कहा कि बदलती तकनीक और बैंकिंग व्यवस्था के अनुरूप कानूनों को भी समय के साथ आधुनिक बनाना आवश्यक है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here