गोंदिया. कचारगढ़ देवस्थान लाखों आदिवासी भक्तों का श्रद्धास्थान है. प्रतिवर्ष कई राज्यों से भक्त बड़ी आस्था के साथ यहां आते हैं. यहां आने वाले भक्तों के लिए सुविधाएं देना जरूरी है. इसलिए, सरकार कचारगढ़ के विकास के लिए प्रयासरत है, ऐसा प्रतिपादन राज्य के आदिवासी विकास मंत्री डा. अशोक उईके ने गोंडी समुदाय के राष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक उत्सव, महा अधिवेशन और कोया पुनेम महापूजा के मौके पर, ‘पारी कुपारलिंगो’ मां काली कंकाली देवस्थान कचारगढ़ यात्रा के दौरान किया. इस अवसर पर राज्य के गृह राज्य मंत्री डा. पंकज भोयर, सांसद डा. प्रशांत पडोले, विधायक संजय पुराम, डा. परिणय फुके, पूर्व विधायक (गढ़चिरोली) देवराव होली, जिप अध्यक्ष लायकराम भेंडारकर, धनेगांव सरपंच सिंधु घरत, जिप सदस्य सविता पुरम, उपविभागीय अधिकारी कविता गायकवाड़, प्रकल्प अधिकारी काशिद व आदिवासी संगठन के अध्यक्ष करण टेकाम उपस्थित थे.
उईके ने कहा, कचारगढ़ आदिवासी समाज की पवित्र भूमि है. आदिवासी भाई यहां बड़ी श्रद्धा से आते हैं. आदिवासीपन हमारी गौरवशाली संस्कृति है. अपनी संस्कृति को बचाकर रखना हमारा कर्तव्य है. इस जगह पर मिले आशीर्वाद की ऊर्जा आदिवासी भाइयों के विकास को प्रेरित करती है. आदिवासी समुदाय ने जल, जमीन और जंगल को बचाया है. सरकार इस समाज की प्राचीन संस्कृति को बचाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करेगी. सरकारी आश्रम स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को अच्छी शिक्षा दी जा रही है. उन्होंने विश्वास जताया कि वे आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक विरासत, भाषा, कला और परंपरा को बचाए रखने पर ध्यान देंगे. उन्होंने कहा कि वे आदिवासियों की समस्याओं को हल करने पर ध्यान देंगे और कचारगढ़ के विकास के लिए सरकारी स्तर पर हर संभव प्रयास करेंगे. सांसद डा. पडोले ने कहा कि कचारगढ़ की यह यात्रा आध्यात्मिक शांति की ओर ले जाती है. हमें अपनी संस्कृति को नहीं भूलना चाहिए. गोंडी भाषा को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा दिलाने के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर निश्चित रूप से प्रयास करेंगे. प्रस्तावना व संचालन भरत मडावी ने किया.
कचारगढ़ के विकास के लिए सरकार प्रयासरत : आदिवासी विकास मंत्री डा. अशोक उईके
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