Wednesday, May 6, 2026
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भीषण गर्मी में वेतन के लिए मजीप्रा सेवानिवृत्त कर्मचारियों का आंदोलन

गोंदिया. महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के सेवानिवृत्त अधिकारी, कर्मचारी पिछले दो महीनों से अपने सेवानिवृत्ति वेतन से वंचित हैं, इसलिए भीषण गर्मी में बुजुर्ग वरिष्ठ कर्मचारियों के लिए उचित पेंशन के लिए लड़ने का समय आ गया है. महालेखाकार कार्यालय द्वारा महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के खातों पर रोक लगाने के कारण अधिकारी-कर्मचारी मार्च महीने से अपने सेवानिवृत्ति वेतन से वंचित हैं. इसके खिलाफ 6 मई को सेवानिवृत्त अधिकारी व कर्मचारियों ने सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए भीषण गर्मी में राज्य भर में महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण कार्यालय के सामने आंदोलन किया. आंदोलनकारी सेवानिवृत्त अधिकारी कर्मचारियों ने उपजिलाधीश मानसी पाटिल व मजीप्रा के कार्यकारी अभियंता के माध्यम से मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के नाम एक ज्ञापन भेजा है.
2017 में महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण की आर्थिक स्थिति के कारण और मजीप्रा पिछली सरकार का एक विभाग है, इसलिए मजीप्रा कर्मचारियों की सेवा के सभी नियम और शर्तें इस सरकार पर लागू होती हैं, तत्कालीन सरकार ने 23 मार्च 2017 को कैबिनेट बैठक में एक निर्णय लिया और मजीप्रा के सेवानिवृत्त और कार्यरत कर्मचारियों के वेतन और सेवानिवृत्ति भत्ते की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए एक सरकारी निर्णय जारी किया और उस निर्णय में यह उल्लेख किया गया कि मजीप्रा कर्मचारियों को सरकारी दर्जा दिया जा रहा है. लेकिन उक्त कार्यवाही 9 वर्षों से लंबित है, महालेखाकार (अकाउंटंट जनरल) कार्यालय ने जलापूर्ति व स्वच्छता विभाग को एक पत्र के माध्यम से सूचित किया है कि मजीप्रा कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति वेतन के लिए वेतन कोड अस्थायी है और यह 31 मार्च 2026 को समाप्त हो जाएगा, इसलिए आगे सेवानिवृत्ति वेतन का भुगतान करना संभव नहीं होगा. इसलिए मजीप्रा कर्मचारियों का मार्च से सेवानिवृत्ति वेतन रोक दिया गया है.  इसलिए मजीप्रा के वृद्ध वरिष्ठ सेवानिवृत्त कर्मचारी काफी हद तक आर्थिक संकट में हैं. आज कई सेवानिवृत्त कर्मचारी पेंशन पर निर्भर हैं और समय पर चिकित्सा उपचार न मिलने के कारण कई बुजुर्ग सेवानिवृत्त कर्मचारी कमजोर हो गए हैं और उनकी हालत खराब हो गई है. इस संबंध में मजीप्रा कर्मचारी संघर्ष कृति समिति की ओर से सरकार के सभी संबंधित विभागों को ज्ञापन दिया गया, लेकिन फिर भी सेवानिवृत्ति वेतन नहीं मिलने के कारण 6 मई को उन्होंने राज्य भर में सेवानिवृत्ति वेतन के लिए आंदोलन किया और तत्काल सेवानिवृत्ति वेतन भुगतान की मांग की है. इस अवसर पर संजयकुमार एच. कटरे, राजू खैरे, दिनेश तुरकर, ओ.बी. सोयाम, एस.आर. भोयर, नासीर मुस्तजा सोयाड, जी.यु. धारकर, जे.डी. लिल्हारे, एन.सी. परमार, एस.बी. पटले, आर.सी. चित्रीव, एन.जी. अरखेल, डी.आर. शहरे, श्रीमती.आर.एच.ठेंगरे, एन.सी.फेंडारकर, जी.एस.बोरकर, एन.डी.सोनवाने, एम.आर.बिजेवार, एफ.पी.फरदे, बी.एस.रहागंडाले, एच.सी.नैकाने, एस.एन.त्रिवेदी, सी.एस.हरिणखेडे, जी.एस.कावडे, धनसिग सुर्यवंशी, डी.पी.खापेकर, ईश्वर के. चांदवानी आदि उपस्थित थे.

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