Monday, May 20, 2024
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वेंटिलेटर बेड की कमी से मरीजो की जान खतरे में

कब थमेगा गोंदिया मेडिकल कालेज से रेफर टू नागपुर का सफर
गोंदिया. मेडिकल कालेज को शुरू होने 7 वर्ष से अधिक का समय बीत गया है इसके बावजुद भी वेंटिलेटर के जरूरतमंद मरीजो का गोंदिया मेडिकल कालेज से रेफर टू नागपुर का सफर थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार 9 अक्टूबर को एक 17 वर्षिय बालक दुर्घटना में गंभीर घायल हो गया जिसे वेटिलेटर की आवश्यकता थी। लेकिन वेंटिलेटर बेड के कमी के चलते उसे नागपुर रेफर करने की सलाह दी गई। जिसके बाद परिजनों ने उसे निजी अस्पताल में प्राथमिक उपचार कर फिर से गोदिया मेडिकल कालेज में भर्ती कराने मे लाया गया। लेकिन कार्यरत डाक्टरों ने भर्ती लेने से मना किया, जब इसकी जानकारी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ताओं को मिली तो तुरंत कार्यकर्ता अस्पताल पहुंच गए और मनसे स्टाइल का उपयोग कर डाक्टरों को पीड़ित बालक को भर्ती कराने को बाध्य किया। तब कही डाक्टरों ने भर्ती कर उपचार शुरू किया। डाक्टरों का कहना था कि, वेंटीलेटर के बेड खाली नही है, जिस कारण नागपुर रेफर करने की सलाह दी गई थीं। तरह से वेंटिलेटर बेड के अभाव में मरीजो की जान खतरे में आ रही है। इस दौरान मनसे के जिला संघटक रितेश गर्ग, तहसील अध्यक्ष सुनील ठाकरे, शहर अध्यक्ष सुरेश चौधरी सहित मनसे के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

बता दे कि गोंदिया जिले की जनसंख्या लगभग 14 लाख से अधिक है। शासन ने उपचार की सुविधा के लिए वर्ष 2015-16 में गोंदिया में शासकीय मेडिकल कालेज शुरू किया। मेडिकल कालेज शुरू होने से ऐसा लग रहा था कि अब मरीजो का उपचार गोंदिया में ही किया जाएगा। नागपुर रेफर करने की नौबत नहीं आएगी लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। गोंदिया मेडिकल कालेज में प्रति दिन सैकड़ों की संख्या मे दुर्घटना, गंभीर बीमारी से पीडित तथा विभिन्न बिमारियो का उपचार कराने के लिए मरिजो को भर्ती किया जाता है। जिसमे से अनेक मरीजो को वेंटिलेटर के उपचार की आवश्यकता होती है लेकिन गोंदिया मेडिकल कालेज में मात्र वंेटिलेटर के 6 बेड ही उपलब्ध होने से मजबुरन मरीजो को नागपुर रेफर करना पड़ रहा है। जिससे मरीजो को समय पर वंेटिलेटर नहीं मिलने से उनकी जान खतरे में आ जाती है। इसी तरह का एक मामला सोमवार 9 अक्टूबर को देखने को मिला। गाेरेगांव तहसील के ग्राम पिंडकेपार निवासी उमेंदर देवीलाल कटरे (17) यह बालक दुर्घटना मे गंभीर रूप से घायल हो गया था जिसे उपचार के लिए गोंदिया मेडिकल कालेज में भर्ती किया गया तो उसे कार्यरत डाक्टरो ने वेंटिलेटर के बेड खाली नहीं होने से नागपुर रेफर करने की सलाह दी। जिस कारण परिजनो ने शहर के एक निजी अस्पताल मे प्राथमिक उपचार कराकर फिर से मेडिकल कालेज में भर्ती करने का प्रयास किया लेकिन डाक्टरों ने भर्ती लेने से साफ इन्कार कर दिया। जिसकी जानकारी मिलते ही मनसे कार्यकर्ताओं ने कार्यरत डाक्टरो को आड़े हाथो लेते हुए मनसे स्टाईल से फिर से उपरोक्त बालक को भर्ती कराने के लिए बाध्य किया। इस तरह से वेंटिलेटर बेड की कमी के कारण मरीजो के जान के साथ इस मेडिकल कालेज मे खिलवाड किया जा रहा है।

मनसे ने स्वास्थ्य अधिकारियों को लिया आड़े हाथो
दुर्घटनाग्रस्त उमेंद्र देवीलाल कटरे को जब फिर से गोंदिया मेडिकल कालेज मंे भर्ती कराने के लिए उनके परिजनो ने लाया तो कार्यरत डाक्टरो ने भर्ती करने से मना कर दिया। जब इसकी जानकारी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के जिला संगठक रितेश गर्ग, तहसील अध्यक्ष सुरेश ठाकरे, शहर अध्यक्ष सुरेश चौधरी तथा कार्यकर्ताओं को लगी तो वे तत्काल मेडिकल कालेज पहुंचकर मेडिकल प्रशासन के डाक्टरो से बातचित कर मरीज को भर्ती करने की विनंती की लेकिन भर्ती करने के संदर्भ में डाक्टरो द्वारा सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जा रहा था तब मनसे ने अपनी स्टाईल से स्वास्थ्य अधिकारियांे को आड़े हाथो लेकर खरीखोटी सुनाई। तब कहीं डाक्टरो ने उपरोक्त पीड़ित बालक को भर्ती कर उपचार शुरू किया। पीड़ित के परिजनो ने मनसे का आभार माना।

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