तेंदूपत्ता संकलन करने गई महिला पर बाघ का हमला, बोंडगांव सुरबन परिसर में डर का माहौल

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गोंदिया. अर्जुनी मोरगांव तहसील के बोंडगांव/सुरबन परिसर में तेंदूपत्ता संकलन करने के लिए जंगल गई एक महिला पर बाघ ने अचानक हमला करने की घटना शनिवार, 9 मई को सुबह 6 बजे के बीच हुई. इस हमले में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई और परिसर में डर का माहौल है. बाघों की बढ़ती मौजूदगी से वन क्षेत्र के गांवों में नागरिकों में चिंता का माहौल है.
जानकारी के अनुसार, बोंडगांव/सुरबन निवासी सुनीता चंद्रकुमार हटवार (47) रोजाना की तरह शनिवार की सुबह अन्य महिलाओं के साथ तेंदूपत्ता संकलन करने के लिए पास के जंगल परिसर में गई थी. वर्तमान में तेंदूपत्ता सीजन चल रहा है, ऐसे में बड़ी संख्या में महिलाएं और नागरिक सुबह से ही जंगल की ओर निकल रहे हैं. इसी दौरान झाड़ियों में बैठे बाघ ने अचानक सुनीता हटवार पर हमला कर दिया. अचानक हुए इस हमले से परिसर में अफरा-तफरी मच गई. सुनीता हटवार के शोर मचाने पर उसके साथ मौजूद महिलाएं हिम्मत दिखाकर मौके पर पहुंचीं. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि महिलाओं का शोर-शराबा और चीख-पुकार सुनकर बाघ जंगल की ओर भाग गया. इस हमले में सुनीता हटवार के हाथ, पीठ और पैर पर गंभीर चोटें आईं. घायल अवस्था में उसे तुरंत जंगल से बाहर निकाला गया और उपचार के लिए ग्रामीण अस्पताल अर्जुनी मोरगांव में भर्ती कराया गया. बताया गया है कि प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सा अधिकारियों द्वारा उसकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है. इधर इस घटना के बाद बोंडगांव/सुरबन और आसपास के गांवों में भय का माहौल बन गया है और नागरिकों के बीच वन क्षेत्र में बाघों के खुले विचरण को लेकर चर्चा हो रही है. ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से इस क्षेत्र में जंगली जानवरों की संख्या में वृद्धि हुई है. इससे तेंदूपत्ता संकलन के लिए जाने वाली महिलाओं में डर पैदा हो गया है. घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और परिसर का निरीक्षण किया. वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे जंगल में अकेले न जाएं और समूह में जंगल में प्रवेश करें. सूत्रों ने यह भी बताया कि बाघ का पता लगाने के लिए गश्त बढ़ाई जाएगी. इस बीच, ग्रामीण वन विभाग से घायल महिला को तत्काल आर्थिक सहायता देने, वन क्षेत्र में लगातार गश्त करने और तेंदूपत्ता संकलन करने जा रहे नागरिकों की सुरक्षा के लिए विशेष उपाय करने की मांग कर रहे हैं. जंगल के आसपास के गांवों में जन जागरूकता अभियान चलाकर नागरिकों को सचेत करने की जरूरत है.

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