गोंदिया. नवेगांव–नागझिरा टाइगर रिजर्व के नागझिरा ब्लॉक अंतर्गत उमरझरी वन परिक्षेत्र के रिसाड़ा बीट में बुधवार (5 अगस्त) शाम करीब 5.30 बजे ड्यूटी के दौरान भालू के हमले में वनरक्षक शामू शरणागत की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई. इस घटना से वन विभाग के कर्मचारियों और वनमजदूरों में गहरा आक्रोश व्याप्त है. कर्मचारियों ने गश्ती व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है.
कर्मचारियों का कहना है कि अप्रैल 2026 से बफर क्षेत्र का पुनर्गठन किया गया था. उस समय स्थानीय ग्राम पंचायतों और ग्रामीणों को रोजगार के अधिक अवसर मिलने का दावा किया गया था, लेकिन वास्तविकता में गश्ती व्यवस्था में असमानता बरती जा रही है.
आरोप है कि नागझिरा ब्लॉक के नागझिरा, उमरझरी, सडक-अर्जुनी, तिरोड़ा, कोका और गडेगांव वन परिक्षेत्रों में प्रत्येक गश्ती कैंप पर केवल एक वनमजदूर की नियुक्ति की गई है, जबकि नवेगांव ब्लॉक के कुछ कैंपों में दो-दो वनमजदूर तैनात किए गए हैं. कर्मचारियों का कहना है कि वन्यजीवों की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों में यह व्यवस्था सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त नहीं है. वन कर्मचारियों ने बताया कि इससे पहले भी नागझिरा क्षेत्र में गश्त के दौरान भालू के हमले में दो वनमजदूर गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं. इसके बावजूद अतिरिक्त मानवबल उपलब्ध कराने की मांग पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई. घटना के बाद वन कर्मचारी व वनमजदूरों ने मांग की है कि वनरक्षक शामू शरणागत की मृत्यु की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, गश्ती व्यवस्था का पुनर्मूल्यांकन किया जाए तथा संवेदनशील क्षेत्रों में पर्याप्त मानवबल, सुरक्षा उपकरण और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं. घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे. मृत वनरक्षक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और विभाग द्वारा आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है. जांच रिपोर्ट के बाद ही घटना के कारणों और जिम्मेदारियों की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी.



