गोंदिया. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा गोंदिया जिले में कांग्रेस संगठन को नई मजबूती देने के उद्देश्य से अमरभाऊ वराडे को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद जिलेभर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। एक साधारण किसान परिवार से निकलकर अपने संघर्ष, शिक्षा और सामाजिक कार्यों के बल पर पहचान बनाने वाले अमरभाऊ वराडे आज जिले की राजनीति में एक मजबूत और जनसामान्य से जुड़े नेतृत्व के रूप में देखे जाते हैं।
अमरभाऊ वराडे के पिता एकोडी स्थित जिला परिषद विद्यालय में प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए। शिक्षक परिवार के संस्कारों में पले-बढ़े अमरभाऊ ने शिक्षा के साथ-साथ समाजसेवा और नेतृत्व क्षमता को भी विकसित किया। उन्होंने B.Sc. Agriculture तथा DBM (डिप्लोमा इन बिजनेस मैनेजमेंट) B. Ed. की शिक्षा प्राप्त की है। कृषि और प्रबंधन क्षेत्र का उनका अध्ययन आज भी उनके कार्यों में दिखाई देता है। उनकी राजनीतिक यात्रा वर्ष 1992 में कृषि महाविद्यालय छात्र संघ अध्यक्ष पद के चुनाव से शुरू हुई। इसके बाद उन्होंने पंजाबराव कृषि विद्यापीठ में छात्र सचिव के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। उनकी संगठन क्षमता और प्रभावशाली वक्तृत्व शैली से प्रभावित होकर युवक कांग्रेस ने वर्ष 1996 में उन्हें भंडारा जिला युवक कांग्रेस का महासचिव और प्रवक्ता नियुक्त किया।
गोंदिया जिला बनने के बाद उन्होंने NSUI जिल्हाध्यक्ष और युवक कांग्रेस के माध्यम से युवाओं को संगठित करने का कार्य किया। वर्ष 2002 में जिला युवक कांग्रेस का नेतृत्व करते हुए उन्होंने जनहित के कई मुद्दों पर आंदोलन, धरना, रास्ता रोको और रैलियों का सफल आयोजन किया। कांग्रेस की सामाजिक न्याय और सर्वधर्म समभाव की विचारधारा के प्रति उनकी निष्ठा हमेशा मजबूत रही है। राजनीति के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्र में भी अमरभाऊ वराडे लगातार सक्रिय रहे हैं। रक्तदान शिविर, निःशुल्क ड्राइविंग लाइसेंस कैंप, युवाओं के लिए मार्गदर्शन, वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं का समाधान तथा सरकारी कार्यालयों में आम लोगों की परेशानियों को दूर करने जैसे कार्यों में उनकी विशेष भूमिका रही है। विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी और फिटनेस मूवमेंट के संयोजक के रूप में भी उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किए हैं। व्यवसाय से बिल्डिंग मटेरियल व्यापारी और सिविल कॉन्ट्रैक्टर अमरभाऊ वराडे को सभी समाज वर्गों को साथ लेकर चलने वाला नेतृत्व माना जाता है। दलित, पिछड़े, शोषित तथा सभी धर्मों के लोगों के बीच उनकी अच्छी पकड़ और सरल स्वभाव ने उन्हें जनता के करीब रखा है। गोंदिया विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने उन पर विश्वास जताते हुए उम्मीदवार बनाया था। चुनाव में हार होने के बावजूद उन्होंने जनसंपर्क और सामाजिक कार्यों की गति कम नहीं होने दी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव हारने के बाद भी जनता के बीच सक्रिय रहना और लोगों की समस्याओं के लिए संघर्ष करना ही एक सच्चे जननेता की पहचान होती है, जिसे अमरभाऊ वराडे ने अपने कार्यों से साबित किया है। आज उन्हें मिली नई जिम्मेदारी से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। जिले में संगठन को मजबूत करने, युवाओं को आगे लाने और आम जनता के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने में अमरभाऊ वराडे की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।






