गोंदिया. नगर परिषद चुनाव उम्मीदवारी नामांकन के आखिरी दिन शहर में राजनीतिक पार्टियों का सैलाब उमड़ पड़ा. कांग्रेस, भाजपा, राकांपा, शिवसेना, बसपा, आप ने शक्ति प्रदर्शन का हुजूम दिखाकर खुद को बेहतर साबित करने की कोशिश की. सड़कों पर महिला, पुरुष और युवाओं की फौज से शहर में राजनीतिक पर्व का अहसास हो रहा था. सभी पार्टियों ने अपने नगराध्यक्ष पद के उम्मीदवारों को मैदान में उतार दिया है. लेकिन अब देखना यह है कि जनता किसी नगराध्यक्ष पद पर बैठने का हकदार बनाती है.
कांग्रेस ने नगर परिषद अध्यक्ष पद के लिए पूर्व नगराध्यक्ष स्व.गोविंदभाऊ शेंडे के पुत्र व पूर्व सभापति सचिन शेंडे को प्रत्याशी बनाया, वहीं भाजपा ने पूर्व नगराध्यक्ष कशिश जायसवाल को मैदान में उतारा. यहां भाजपा से कद्दावर ओबीसी नेता डॉ. प्रशांत कटरे को टिकट न मिलने से नाराज होकर वे एकनाथ शिंदे की शिवसेना से नगराध्यक्ष प्रत्याशी मैदान में है. इसी तरह महाराष्ट्र सरकार में भाजपा युति में शामिल अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का यहाँ गठबंधन नही होने पर राकांपा ने माधुरी नासरे को प्रत्याशी बनाकर महिला चेहरा पेश किया है. आम आदमी पार्टी ने पक्ष की बागडोर अनेक वर्षों से संभाल रहे पूर्व जिलाध्यक्ष उमेश दमाहे को प्रत्याशी के रूप में उतारा है.
कांग्रेस ने नगर परिषद अध्यक्ष पद के लिए पूर्व नगराध्यक्ष स्व.गोविंदभाऊ शेंडे के पुत्र व पूर्व सभापति सचिन शेंडे को प्रत्याशी बनाया, वहीं भाजपा ने पूर्व नगराध्यक्ष कशिश जायसवाल को मैदान में उतारा. यहां भाजपा से कद्दावर ओबीसी नेता डॉ. प्रशांत कटरे को टिकट न मिलने से नाराज होकर वे एकनाथ शिंदे की शिवसेना से नगराध्यक्ष प्रत्याशी मैदान में है. इसी तरह महाराष्ट्र सरकार में भाजपा युति में शामिल अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का यहाँ गठबंधन नही होने पर राकांपा ने माधुरी नासरे को प्रत्याशी बनाकर महिला चेहरा पेश किया है. आम आदमी पार्टी ने पक्ष की बागडोर अनेक वर्षों से संभाल रहे पूर्व जिलाध्यक्ष उमेश दमाहे को प्रत्याशी के रूप में उतारा है.
राजनीतिक पार्टियां, इन्हीं चेहरों को फ्रंट पर लाकर गोंदिया में विकास का रोल मॉडल पेश करना चाहती है. गोंदिया की जनता को नगर के 22 प्रभागों से 44 नगरसेवकों को निर्वाचित करना है. इनमें 22 पुरूष तो 22 महिला नगरसेवक के ऊपर नगराध्यक्ष का पद और उसपर बैठने वाले प्रत्याशी को चुनने का, मत देने का अधिकार जनता का है. जनता को रिझाने का सिलसिला शुरू हो चुका है. नामांकन के बाद से ही सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल होना शुरू हो गई है. जिन्हें टिकट नहीं मिली उनके घरों में मायूसी पसरी पड़ी है. वहीं कुछ राजनीतिक गणित बिगाड़ने का समीकरण गढ़ रहे है.






