गोंदिया. जिले में इस वर्ष 17 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. वृक्षारोपण अभियान को सिर्फ पर्यावरण संरक्षण तक सीमित न रखते हुए इसे पर्यटन विकास से भी जोड़ने की योजना बनाई जा रही है. इसी संदर्भ में आयोजित समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी मंगेश गोंदावले ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिले में ऐसा वृक्षारोपण किया जाए, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सके और अधिक से अधिक पर्यटक जिले की ओर आकर्षित हों.
इस बैठक में बताया कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लक्ष्य के अनुरुप महाराष्ट्र को भी हरित और विकसित राज्य बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है. हरित महाराष्ट्र आयोग अंतर्गत राज्य भर में 300 करोड़ वृक्ष लगाने का लक्ष्य तय किया गया है. इस अभियान के सफल होने पर राज्य में वन एवं वृक्ष आच्छादन बढ़कर लगभग 33 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है. इसी अभियान के तहत गोंदिया जिले को इस वर्ष 17 लाख वृक्षारोपण का लक्ष्य मिला है.
जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित इस बैठक में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, उपवनसंरक्षक पवन कुमार जोंग, निवासी उपजिलाधिकारी भैयासाहेब बेहरे समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे. इसके अलावा अदानी फाउंडेशन, नेचर केयर फाउंडेशन, वृक्षधारा फाउंडेशन, लायंस क्लब इंटरनेशनल, सांस्कृतिक महिला मंडल तथा सावन बहेकार, सेवा सारस मित्र जैसी सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया. जिलाधिकारी डॉ. मंगेश गोंदावले ने कहा कि गोंदिया जिला पहले से ही लगभग 51 प्रतिशत वन क्षेत्र से आच्छादित है. इस प्राकृतिक संपदा को और समृद्ध बनाने के लिए वैज्ञानिक एवं योजनाबद्ध तरीके से वृक्षारोपण करना आवश्यक है. उन्होंने बताया कि भविष्य में कार्बन क्रेडिट और ग्रीन क्रेडिट की दृष्टि से भी यह अभियान महत्वपूर्ण साबित होगा. वृक्षारोपण के माध्यम से बीज उत्पादन नर्सरी निर्माण और अन्य गतिविधियों द्वारा आर्थिक लाभ एवं रोजगार के अवसर भी उत्पन्न किए जा सकते हैं. बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जिले की जलवायु और पर्यावरण के अनुकूल पौधों का ही चयन किया जाए. जिलाधिकारी ने कहा कि बड (बरगद) और पीपल जैसे वृक्ष पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में अत्यंत उपयोगी हैं, इसलिए इनके रोपण को प्राथमिकता दी जाएगी. साथ ही ऐसे वृक्ष लगाए जाएंगे, जो ग्रामीणों के उदरनिर्वाह में भी सहायक बन सकें.
जीआई टैगिंग से होगा पौधों का संरक्षण
नर्सरी निर्माण और अन्य गतिविधियों द्वारा आर्थिक लाभ एवं रोजगार के अवसर भी उत्पन्न किए जा सकते हैं. बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जिले की जलवायु और पर्यावरण के अनुकूल पौधों का ही चयन किया जाए. जिलाधिकारी ने कहा कि बड (बरगद) और पीपल जैसे वृक्ष पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में अत्यंत उपयोगी हैं, इसलिए इनके रोपण को प्राथमिकता दी जाएगी. साथ ही ऐसे वृक्ष लगाए जाएंगे, जो ग्रामीणों के उदरनिर्वाह में भी सहायक बन सकें. प्रशासन ने अगले 20 वर्षों के लिए दीर्घकालीन वृक्षारोपण योजना तैयार करने की बात कही है. इसके अंतर्गत किस क्षेत्र में कौन-से वृक्ष लगाए जाएंगे, इसकी विस्तृत जानकारी तैयार की जाएगी. हरित महाराष्ट्र आयोग के माध्यम से लगाए गए पौधों की जीआई टैगिंग भी की जाएगी, जिससे अगले पांच वर्षों तक उनके रखरखाव और संरक्षण की निगरानी सुनिश्चित की जा सकेगी. प्रशासन को उम्मीद है कि इस अभियान से गोंदिया जिले का पर्यावरण और पर्यटन दोनों मजबूत होंगे






