गोंदिया जिले में सोनम वांगचुक, अभिजीत दीपके के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन, केंद्र सरकार का विरोध, प्रतीकात्मक शवयात्रा निकाली 

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गोंदिया. शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा तथा लोकतांत्रिक तरीके से संवाद की मांग को लेकर सोमवार, 20 जुलाई को गोंदिया में जोरदार आंदोलन किया गया. शहर के डा. बाबासाहब आंबेडकर चौक पर शिक्षा बचाव समन्वय समिति, विभिन्न सामाजिक संगठनों और छात्र संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रदर्शन में शिक्षा संबंधी मुद्दों पर आमरण अनशन कर रहे सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके के समर्थन में आवाज बुलंद की गई. साथ ही नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के कारण विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर उत्पन्न चिंता पर केंद्र सरकार से गंभीरता से ध्यान देने की मांग की गई. यह प्रदर्शन गोंदिया शहर में ही नहीं जिले के आमगांव, सालेकसा, तिरोड़ा, गोरेगांव सहित अन्य तहसीलों में भी किया गया.

गोंदिया में हुए आंदोलन में गोंदिया नगर परिषद के नगराध्यक्ष सचिन शेंडे, शिवसेना (उबाठा) के जिलाध्यक्ष पंकज यादव, हरीश तुलसकर, योगेश अग्रवाल, आंदोलन समिति के अतुल सतदेवे सहित संविधान मैत्री संगठनों के पदाधिकारी, शिक्षक, अभिभावक, युवा तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए. वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा केवल एक शैक्षणिक विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य की मजबूत नींव है. उल्लेखनीय है कि मुख्य मंच पर भारतीय संविधान की प्रस्तावना को सम्मानपूर्वक स्थापित किया गया था. प्रदर्शनकारियों के हाथों में तिरंगा और विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा की मांग वाले तख्तियां थीं. आंदोलन के दौरान लगाए गए नारों के माध्यम से शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की गई. इस अवसर पर राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन उपविभागीय अधिकारी चंद्रभान खंडाईत को सौंपा गया. ज्ञापन में मांग की गई कि सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके के स्वास्थ्य व सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, केंद्र सरकार उनके प्रतिनिधियों से तत्काल सकारात्मक संवाद शुरू करे, शिक्षा व विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार कर उचित निर्णय ले तथा शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलनों के प्रति संवैधानिक और संवेदनशील रवैया अपनाए. आंदोलन के समापन पर वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर समाज और सरकार के बीच सार्थक संवाद, संवेदनशीलता और विश्वास ही भविष्य की मजबूत व पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था की आधारशिला बन सकते हैं.

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