महाराष्ट्र की बाघित का एमपी में विचरण

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किरनापुर में मिले नागझिरा से निकली बाघिन के पगमार्क
गोंदिया. मध्यप्रदेश का बालाघाट जिला महाराष्ट्र से लगा हुआ है. महाराष्ट्र के नागझिरा की एक बाघिन पिछले तीन माह से बालाघाट के जंगलों में विचरण कर रही हैं. दरअसल बाघिन किरनापुर वन परिक्षेत्र में बीते कुछ दिनों से लोकेशन मिलने के बाद 19 जुलाई को दोपहर समय में मुख्यालय किरनापुर के पवार भवन के पास टीवीएस एजेंसी के पीछे खेतों में पगमार्क किसानों ने देखे. जिसपर खेत मालिक सेवकराम पटले द्वारा वन परिक्षेत्र कार्यालय में जाकर इसकी सूचना दी गई.
नागझिरा अभयारण्य नवेगांव जंगल क्षेत्र में 20 मई को राज्य के वनमंत्री सुधीर मुनगंटीवार की उपस्थिति में दो बाघिनों को छोड़ा गया था. जिसमें से एक बाघिन गोरेगांव वन क्षेत्र में भटक रही थी. इसके बाद बाघिन गोंदिया तहसील के छिपीया से थोड़ी दूरी पर मध्यप्रदेश के कड़कना जंगल देखी गई थी. तब से बाघिन मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में ही विचरण कर रही हैं.

15-20 सदस्यीय टीम कर रही तलाश
बाघिन की तलाशी और पतासाजी करने महाराष्ट्र राज्य वन परिक्षेत्रों की टीमें पिछले 15 दिनों से जिसमें लगभग 15 से 20 लोग अलग-अलग ग्रुप बनाकर कॉलर आईडी के माध्यम से उक्त बाघिन की लोकेशन ट्रेस करते जा रहे है. अपनी साथी से बिछड़कर आई बाधिन की उम्र लगभग 5 वर्ष बताई गई है.

इस जगह किया शिकार
बाघिन द्वारा वन परिक्षेत्र के ग्राम सीतापार में एक मवेशी का शिकार किया गया था. पहले बाघ या बाघिन मवेशी का शिकार कर खून पीते है और उसे अपने भोजन को सुरक्षित स्थान पर छुपा और पुन: घुम फिर कर वापस जाकर उक्त शिकार का भरपेट भोजन करते है.

हिंसन नहीं हुईं बाघिन
वन परिक्षेत्र अधिकारी जगतदास खरे ने बताया कि उसे पकड़ सकते है, लेकिन अभी तक वह हिंसक नहीं हुई है. उसे भोजन मिल गया है, एक बार भोजन मिलने के उपरांत वह आठ-दस दिनों तक बिना खाए रह सकती है. महाराष्ट्र राज्य की वन परिक्षेत्र की टीमें लोकेशन के माध्यम से उस पर सतत निगरानी रखे हुए है. गनीमत तो यह रही कि किरनापुर वन परिक्षेत्र में बाघिन के द्वारा बिना उपद्रव या तांडव मचाए बिना हट्टा वन परिक्षेत्र चली गई है. जिस पर वन विभाग द्वारा सघन और सतत निगरानी रखी जा रही है.

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