एनएचएम कर्मियों का भविष्य अधर में, गुरूवार को विधान भवन पर मोर्चा

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गोंदिया : पिछले 15 वर्षों से स्वास्थ्य विभाग में एनएचएम कर्मी सेवा दे रहे है। कई बार मानधन बढ़ाने के साथ सरकारी सेवा में शामिल किए जाने की मांग की जा रही है। 15 वर्षों से सरकार आश्वासन को डोज देकर उनसे सेवा ले रही है, लेकिन मांगों को मंजूर नहीं किया जा रहा है। सरकारी सेवा में शामिल किया जाए समान काम-समान वेतन दिया जाए। इस मुख्य मांग को लेकर गुरूवार 14 दिसंबर को नागपुर विधान भवन पर एनएचएम कर्मियों द्वारा मोर्चा निकाला जा रहा है, जिससे फिर से जिले की स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हो जाएगी।
इस संदर्भ में एनएचएम कर्मियों की संगठना द्वारा जानकारी दी गई कि वर्ष 2005 से राष्ट्रीय स्वास्थ्य ग्रामीण अभियान की शुरूआत की गई। 2007 से एनएचएम कर्मियों की पहली बॅच अर्थात नर्स तथा अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की भरती लेकर नियुक्ती की गई है। उस दौरान मात्र 5 हजार रूपए के मानधन पर नियुक्ती दी गई थी। अल्प मानधन पर भी एनएचएम कर्मियों ने बेहतर सेवा दी। लेकिन एनएचएम कर्मियों को सरकारी सेवा का लाभ नहीं दिया जा रहा है।
इस संदर्भ में जानकारी देते हुए कर्मचारियों ने बताया कि वर्तमान में मात्र 20 हजार से 21 हजार रूपए ही मानधन दिया जा रहा है। जिले में 1200 से अधिक कर्मचारी होकर राज्य में एनएचएम के 40 हजार कर्मचारी सेवा दे रहे है। सरकारे बदल गई, लेकिन एनएचएम कर्मियों की मांगे जस की तस है। संगठन द्वारा मांग की गई कि कर्मियों को सरकारी सेवा में शामिल कर समान काम-समान वेतन का लाभ दिया जाए। इस मांग को लेकर सैकडों बार मोर्चा, आंदोलन, निवेदन, चर्चा, बैठक, मंत्री, जनप्रतिनिधि तथा अधिकारियों के साथ ली गई। इस दौरान मंत्री तथा अधिकारियों द्वारा आश्वासन देकर आंदोलन को पिछे लेने में बाध्य किया गया। पिछले 25 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर एनएचएम कर्मी चले जाने से जिले की ही नहीं तो राज्य की स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हो गई थी। जिसका असर मरीज, गर्भवती महिला, नवजात बालक तथा ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों पर दिखाई दिया। उपरोक्त समस्या को देखते हुए फिर से ठोस आश्वासन देकर आंदोलन को पिछे लेने के लिए बाध्य किया गया, लेकिन संगठन का कहना है कि अब तक इस संदर्भ में परिपत्रक जारी नहीं किया गया है। इस मांग को लेकर गुरूवार 14 दिसंबर को नागपुर विधान भवन पर विशाल मोर्चा एनएचएम कर्मियों द्वारा निकाला जा रहा है। इस मोर्चे से जिले की फिर से स्वास्थ्य सेवा लड़खड़ाने की संभावना जताई गई है।

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