गोंदिया. देवरी तहसील के चिचगढ़-ककोड़ी मार्ग पर गुरुवार को एक दुर्लभ फ्लाइंग स्क्विरल (उड़न गिलहरी) घायल अवस्था में मिलने का मामला सामने आया. वन्यजीव प्रेमी की सतर्कता और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई से इस दुर्लभ जीव की जान बच गई. वन विभाग ने घायल उड़न गिलहरी को अपने कब्जे में लेकर उसका उपचार शुरू कर दिया है.
जानकारी के अनुसार, गुरुवार को महेश रहांगडाले चिचगढ़-ककोड़ी मार्ग से गुजर रहे थे. इसी दौरान उनकी नजर सड़क किनारे घायल अवस्था में पड़ी एक गिलहरी पर पड़ी. करीब से देखने पर उन्हें पता चला कि वह सामान्य गिलहरी नहीं, बल्कि दुर्लभ प्रजाति की फ्लाइंग स्क्विरल है. उन्होंने तत्काल इसकी सूचना वनरक्षक लोकेश टेंभरे और सुरेश रहांगडाले को दी. सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घायल उड़न गिलहरी को सुरक्षित रेस्क्यू कर प्राथमिक उपचार के लिए अपने संरक्षण में लिया. चिचगढ़ वन परिक्षेत्र अधिकारी पी.बी. वाडे ने बताया कि घायल उड़न गिलहरी का उपचार चिकित्सकीय निगरानी में किया जा रहा है. उसके पूरी तरह स्वस्थ होने और प्राकृतिक वातावरण में रहने योग्य होने के बाद उसे सुरक्षित रूप से उसके प्राकृतिक आवास यानी जंगल में छोड़ दिया जाएगा. वन विभाग की त्वरित कार्रवाई और महेश रहांगडाले की सतर्कता की क्षेत्रभर में सराहना की जा रही है.
शिकार और तस्करी पर कड़ी सजा का प्रावधान
वन विभाग ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 में समय-समय पर किए गए संशोधनों के तहत भारत में पाई जाने वाली विशाल गिलहरियों और फ्लाइंग स्क्विरल को संरक्षित वन्यजीवों की श्रेणी में रखा गया है. इनके शिकार, अवैध कब्जे, पालतू बनाने, नुकसान पहुंचाने या तस्करी करने पर कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है. अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी कोई दुर्लभ वन्यजीव घायल या संकट में दिखाई दे तो उसकी जानकारी तुरंत वन विभाग को दें.



