गोंदिया. जिलाधीश डॉ. मंगेश गोंदावले की अध्यक्षता में जिला स्तरीय निरीक्षण समिति ने 15 मई को बाल देखभाल संस्था, शासकीय बाल निरीक्षणगृह व आसरा शिशुगृह (विशेष दत्तक ग्रहण संस्थान) को भेंट देकर निरीक्षण किया.
महिला व बाल विकास विभाग के शासकीय बाल निरीक्षणगृह बालगृह में 6 से 18 वर्ष तक के अनाथ, निराश्रित, निराश्रित, घर से भागे हुए, खोये हुए, बाल विवाह करने वाले, देखभाल व संरक्षण की आवश्यकता वाले बाल श्रमिकों को बाल गृह में प्रवेश दिया जाता है, जबकि कानूनी विवादों वाले बच्चों को बाल कल्याण समिति व किशोर न्याय मंडल के आदेश के तहत निरीक्षण गृह में प्रवेश दिया जाता है. इसके अलावा, 0 से 6 वर्ष की आयु के अनाथ, परित्यक्त बच्चों को विशेष दत्तक ग्रहण संस्थानों (शिशुगृह) में प्रवेश दिया जाता है. उक्त बच्चों को केंद्रीय दत्तक ग्रहण विधान प्रक्रिया के माध्यम से अदालती प्रक्रिया पूरी करने के बाद गोद लेने के लिए स्वतंत्र किया जाता है और गोद लिया जाता है. उक्त संस्था का जिलाधीश डॉ. मंगेश गोंदावले की उपस्थिति में जिला स्तरीय निरीक्षण समिति द्वारा संस्थाओं में उपलब्ध सुविधाओं का निरीक्षण किया गया. बच्चों के लिए भोजन व्यवस्था, आश्रय, खेल उपकरण, मनोरंजन कक्ष, अध्ययन कक्ष, परामर्श कक्ष, आगंतुकों के लिए बैठने की व्यवस्था, बच्चों की शैक्षणिक प्रगति आदि का निरीक्षण किया गया. उक्त संस्था के निरीक्षण के दौरान चाइल्ड हेल्प लाइन 1098 में भेंट देकर कॉल व कॉल रिकार्डिंग तथा डैशबोर्ड पर जानकारी ली गई.
रक्षा गार्डों, देखभाल वाहक व चाइल्ड हेल्प लाइन कर्मचारियों के प्रशिक्षण के संबंध में जिलाधीश डा. मंगेश गोंदावले ने निर्देश दिए. आसरा शिशुगृह (विशेष दत्तक ग्रहण संस्थान) के भेंट के दौरान, एक 4 महीने की बच्ची, जिसे केंद्रीय दत्तक ग्रहण कानून की प्रक्रिया पूरी करने के बाद जिलाधीश के हस्ते रायपुर छत्तीसगढ़ के एक अभिभावक को सौंप दिया गया. इस अवसर पर जिला महिला व बाल विकास अधिकारी तुषार पौनीकर, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा. अभिजित गोल्हार, डा. स्नेहा शर्मा, डा. सचिन उईके, बालगृह की अधीक्षिका मनिषा आंबेडारे, आचल फुलेकर, विनोदकुमार माने, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष श्रीमती खोब्रागडे, कापगते, हलमारे, बोकडे, रहांगडाले आदि उपस्थित थे.
जिलाधीश की अध्यक्षता में गठित समिति ने महिला व बाल विकास विभाग के संस्थानों को दी भेंट
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