गोंदिया. जिले में गोवंश हत्या प्रतिबंधक कानून का प्रभावी क्रियान्वयन करने के साथ ही मोकाट पशुओं, कुत्तों के बढ़ते हमलों और पशुओं के अवैध परिवहन पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. इस संबंध में जिला प्राणी क्लेश प्रतिबंधक समिति की बैठक अपर जिलाधिकारी अभिजित घोरपड़े की अध्यक्षता में जिलाधिकारी कार्यालय में हुई. बैठक में पशुसंवर्धन विभाग के जिला उपायुक्त डॉ. जालिंदर तिटमे, सहायक आयुक्त डॉ. संजय गायगवळी, पुलिस निरीक्षक आर. के. सिंगनजुडे, सभी नगर परिषद एवं नगर पंचायतों के मुख्याधिकारी तथा विभिन्न गौशालाओं के पदाधिकारी उपस्थित थे.
अपर जिलाधिकारी घोरपड़े ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया की गाइडलाइन के अनुसार जिले की प्रत्येक नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्र में Animal Birth Control Unit स्थापित करने के निर्देश दिए. शहरों में मोकाट पशुओं की बढ़ती संख्या के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है. ऐसे पशुओं का नियमानुसार बंदोबस्त करने के निर्देश भी उन्होंने दिए. जिले में बढ़ रही कुत्ते के काटने की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं को प्रभावी उपाय करने के निर्देश दिए गए. वहीं, पशुओं के अवैध परिवहन पर पुलिस विभाग को कड़ी कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश अपर जिलाधिकारी ने दिए। पकड़े गए पशुओं को अधिकृत Animal Shelter House में रखने को कहा गया.
निधि के लिए जिला नियोजन समिति को प्रस्ताव
प्राणी जन्म नियंत्रण केंद्रों की स्थापना के लिए आवश्यक निधि उपलब्ध कराने हेतु जिला नियोजन समिति के समक्ष प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए. इसके अलावा प्रत्येक पुलिस थाने के अनुसार दर्ज मामलों का वर्गीकरण, जिले की गौशालाओं की अद्यतन सूची और मासिक घटनाओं का रिकॉर्ड तैयार करने पर भी जोर दिया गया. जिला प्राणी क्लेश प्रतिबंधक समिति में अशासकीय सदस्यों की नियुक्ति करने के संबंध में भी बैठक में चर्चा हुई. पशुसंवर्धन विभाग के जिला उपायुक्त डॉ. जालिंदर तिटमे ने जिले में संचालित अधिकृत गौशालाओं की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि पशुगणना हर पांच वर्ष में की जाती है.



