गोंदिया. ग्रामीण इलाकों में गर्भवती महिला के रजिस्ट्रेशन से लेकर उस महिला के प्रसव तक की पूरी जिम्मेदारी उठाने वाली आशा पिछले 13 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. इसलिए अब ग्रामीण इलाकों में घर पर या यात्रा के दौरान बच्चे के जन्म के मामले सामने आ रहे हैं. इसलिए आशा सेविकाओं की हड़ताल महिलाओं की जान पर आ गई है.
सड़क अर्जुनी तहसील के मसरामटोला/शेंडा की एक महिला को असहनीय प्रसव पीड़ा हो रही थी और निराशा में उसने घर पर ही बच्चे को जन्म दिया. यह घटना 28 अक्टूबर सुबह करीब 9 बजे की है. इसी बीच प्रसव के बाद उसे शेंडा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया. आशा व गुट प्रवर्तकों के इस समय हड़ताल पर होने के कारण गर्भवती माताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और उनकी समय-समय पर होने वाली जांच व अन्य जानकारी बाधित हो रही है. जिले में आशा व गुट प्रवर्तक पिछले बारह-तेरह दिनों से हड़ताल पर हैं. आशा सेविका के माध्यम से ही गांव की महिलाओं की डिलीवरी अस्पताल में कराने का प्रयास किया जाता है. लेकिन हाल ही में उनके हड़ताल पर रहने से गर्भवती माताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. सरकार आशा सेविकाओं की मांगों को पूरा करें, ऐसी मांग अब ग्रामीण कर रहे हैं.



