मनरेगा, घरकुल योजनाओं में जिम्मेदारी तय करने की मांग
गोंदिया. महाराष्ट्र विकास सेवा राजपत्रित अधिकारी संगठना की ओर से घरकुल और मनरेगा योजनाओं में जिम्मेदारी तय करने की मुख्य मांग को लेकर सोमवार, 8 दिसंबर से अनिश्चितकालीन लीव आंदोलन किया जा रहा है. इस आंदोलन में जिला परिषद प्रशासन में कार्यरत विकास सेवा के सभी राजपत्रित अधिकारियों ने भाग लिया. महाराष्ट्र विकास राजपत्रित अधिकारी संगठन के अध्यक्ष व जिला परिषद सामान्य प्रशासन विभाग के उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी फरेंद्र कुतिरकर ने कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार स्तर से मांगें मान नहीं ली जाती.
आंदोलन में संगठन के मुख्य सलाहकार तथा अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा. तानाजी लोखंडे, जिला ग्रामीण विकास यंत्रणा के प्रकल्प संचालक प्रमिला जाखलेकर, संगठन के उपाध्यक्ष तथा पंचायत विभाग के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी मधुकर वासनिक, नरेगा के गुटविकास अधिकारी डी.एस. लोहबरे, कोषाध्यक्ष तथा गुट विकास अधिकारी सालेकसा संजय पुरी, सदस्य तथा गुट विकास अधिकारी गोंदिया जितेंद्र देवरे, गुट विकास अधिकारी तिरोड़ा संघमित्रा कोल्हे, उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी जल व स्वच्छता विजय लोंढे, गुट विकास अधिकारी अर्जुनी मोरगांव पल्लवी वाडेकर, गुट विकास अधिकारी देवरी सतीश लिल्हारे, सहायक गुट विकास अधिकारी पंचायत एस.आई. वैद्य, सहायक गुट विकास अधिकारी गोरेगांव एच.वी. गौतम, सहायक गुट विकास अधिकारी सड़क अर्जुनी डी.एम. खोटेले आदि शामिल हुए हैं. उल्लेखनीय है कि, अगर मनरेगा, घरकुल योजना में तकनीकी प्रणाली और ठेका कर्मचारियों की हैंडलिंग में कोई गलती है, तो सीधे गुटविकास अधिकारी पर जिम्मेदारी तय की जा रही है. मनरेगा मामले में, 1 दिसंबर को आर्वी पंचायत समिति की गुट विकास अधिकारी सुनीता मरस्कोल्हे को प्राथमिक प्रशासनिक जांच से पहले गिरफ्तार किया गया था. इसके अलावा, 7 से 8 गुट विकास अधिकारियों को गिरफ्तार किए जाने की संभावना है. इस घटना का विरोध करते हुए, 2 दिसंबर को राज्य भर के सभी राजपत्रित अधिकारी संघों ने सरकार से समाधान निकालने का अनुरोध किया. वहीं 4 व 5 दिसंबर को राज्य के सभी महाराष्ट्र विकास सेवा अधिकारी संघों द्वारा सामूहिक छुट्टी आंदोलन का आयोजन किया गया. इस बीच, महाराष्ट्र विकास सेवा अधिकारी संगठन ने मांग की है कि गुट विकास अधिकारी, जो महाराष्ट्र विकास सेवा की रीढ़ हैं, को काम करने के लिए सुरक्षित और सही माहौल दिया जाए, और घरकुल और मनरेगा योजना में जिम्मेदारी तय की जाए, जब तक इस योजना में गलती साबित न हो जाए, तब तक गुट विकास अधिकारियों के खिलाफ सीधे कोई मामला दर्ज या गिरफ्तारी न की जाए, ऐसे साफ निर्देश दिए जाएं, और डीएसपी व तकनिकी प्रक्रिया में अधिकारी और संविधा पर काम करने वाले कर्मचारियों के बीच जिम्मेदारी का बंटवारा साफ करते हुए एक संरक्षणात्मक निती की घोषणा की जाए. ऐसी मांग का ज्ञापन जिलाधीश के माध्यम से ग्रामविकास विभाग के प्रधान सचिव को दिया गया है.
राजपत्रित अधिकारियों का सामूहिक छुट्टी आंदोलन, जिला परिषद अधिकारियों की भागीदारी
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