‘चला शाळेत जाऊया’ अभियान की समीक्षा; गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ कौशल विकास और मूलभूत सुविधाओं पर जोर
गोंदिया. शिक्षा के बिना देश की प्रगति संभव नहीं है। शिक्षा समाज का केंद्रबिंदु होनी चाहिए। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ आवश्यक सुविधाएं और कौशल आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना जरूरी है। यह बात शिक्षा आयुक्त सचिंद्रप्रताप सिंह ने कही। जिलाधिकारी कार्यालय के सभागार में बुधवार को ‘चला शाळेत जाऊया’ अभियान की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी मंदार पत्की, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेनित चंद्रा दोंतुला, जिला नोडल अधिकारी प्रकाश मुकूंद, डायट प्राचार्य राजकुमार हिवारे सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
सिंह ने कहा कि आज के विद्यार्थी देश का भविष्य हैं। उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने पर उनका भविष्य उज्ज्वल होगा। शासन की विभिन्न योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन स्कूल स्तर तक होना चाहिए। स्कूलों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जिला विकास समिति (DPDC) के माध्यम से निधि उपलब्ध कराकर विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाएं देने पर जोर दिया जाए। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए स्कूलों में विभिन्न गतिविधियों और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाए। विद्यार्थियों की शैक्षणिक कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करना शिक्षकों की जिम्मेदारी है। शिक्षकों को अपनी भूमिका और जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभाने के निर्देश भी उन्होंने दिए।
चार आकांक्षी तहसीलों पर विशेष ध्यान
संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत आकांक्षी जिलों और तहसीलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गोंदिया जिले की सालेकसा, देवरी, अर्जुनी-मोरगांव और सड़क अर्जुनी तहसीलों को आकांक्षी तहसीलों के रूप में चिन्हित किया गया है। इन क्षेत्रों के स्कूलों में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। सिंह ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा के बाद दिव्यांग विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने का प्रमाण अधिक दिखाई देता है। ऐसे विद्यार्थियों के अभिभावकों को विश्वास में लेकर उन्हें उपयुक्त स्कूलों में दाखिल कराने की जिम्मेदारी स्थानीय शिक्षकों को निभानी चाहिए।
हर माह स्कूलों का निरीक्षण करें
शिक्षा विभाग के संसाधन व्यक्तियों की क्षमता का समय-समय पर मूल्यांकन करने के लिए उनकी परीक्षाएं ली जाएं। संसाधन व्यक्ति सक्षम हों और हर महीने स्कूलों का दौरा कर शैक्षणिक गुणवत्ता की समीक्षा करें। शिक्षा विभाग के अलावा अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी एक-एक स्कूल को गोद लेकर उसके विकास में योगदान दें। पीएम पोषण योजना के तहत विद्यार्थियों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता जांचने के लिए किसी एक विद्यार्थी की मां से भोजन चखवाने की व्यवस्था करने की सूचना भी उन्होंने दी।
शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण को प्राथमिकता
विद्यार्थियों की मूलभूत जरूरतें पूरी करने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में पर्याप्त निधि खर्च की जाए। उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया जाए, ताकि उन्हें प्रोत्साहन मिले और स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार हो। विद्यार्थियों की क्षमता और गुणवत्ता की पहचान आंगनवाड़ी अथवा पहली कक्षा से ही कर उसके अनुसार मार्गदर्शन किया जाए। यू-डायस प्रणाली से छात्राओं की स्कूल से अनुपस्थिति की जानकारी मिलती है। इसका उपयोग कर छात्राओं की उपस्थिति बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
बारहवीं तक जिले में ही शिक्षा की सुविधा
जिले के विद्यार्थियों को बारहवीं तक की शिक्षा के लिए दूसरे जिलों में जाने की जरूरत न पड़े, इसके लिए जिले में ही गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सुविधाएं विकसित की जाएं। प्रत्येक स्कूल में शुद्ध पेयजल, स्वच्छ शौचालय, साफ-सफाई, खेल मैदान, बाउंड्रीवाल, बिजली, आवश्यक फर्नीचर और ई-सुविधाएं उपलब्ध होना जरूरी है।
AI और कौशल विकास पर जोर
बदलते दौर के साथ शिक्षा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीक का उचित उपयोग किया जाए। व्यावसायिक शिक्षा समय की जरूरत है। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में विद्यार्थियों के कौशल विकास पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। गांव और स्कूल के बीच संबंध मजबूत कर शिक्षा प्रक्रिया में समाज की भागीदारी बढ़ाई जाए।
‘शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं’
शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि दैनिक व्यवहार और अनुभवों से भी विद्यार्थी बहुत कुछ सीखते हैं। इसलिए विद्यार्थियों को अनुभव आधारित, व्यवहारिक और कौशल आधारित शिक्षा दी जानी चाहिए। सिंह ने कहा कि ‘माझी शाळा सशक्तीकरण’ केवल शिक्षा विभाग की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रशासन, शिक्षक, अभिभावक और समाज मिलकर कार्य करें, ताकि जिले के प्रत्येक विद्यार्थी तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंच सके। उन्होंने ‘चला शाळेत जाऊया’ अभियान को और प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए।
स्कूलों का किया निरीक्षण
बैठक के बाद शिक्षा आयुक्त सचिंद्रप्रताप सिंह ने जिले के विभिन्न स्कूलों का दौरा कर वहां उपलब्ध सुविधाओं का निरीक्षण किया। जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, वहां स्कूल प्रबंधन समिति स्थानीय शिक्षित नागरिकों को स्वैच्छिक रूप से अस्थायी शिक्षण कार्य के लिए प्रोत्साहित करे। वहीं, स्कूल में कोई कमरा खाली होने पर उसे अध्ययन कक्ष में परिवर्तित करने की सूचना भी उन्होंने दी। जिलाधिकारी मंदार पत्की ने जिले में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाने तथा शिक्षा आयुक्त द्वारा दिए गए निर्देशों का कड़ाई से पालन करने का आश्वासन दिया।



