Sunday, May 19, 2024
Google search engine
HomeUncategorizedगोंदिया की नप स्कूल खतरनाक

गोंदिया की नप स्कूल खतरनाक

जान हथेली पर रखकर करनी पढ़ रही है पढ़ाई
गोंदिया. शिक्षा विभाग की ओर से भले ही शिक्षा को मनोरंजक बनाने और स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. लेकिन शहर में नगर परिषद के स्कूल इमारत जर्जर हो गए हैं. इसका असर छात्रों की संख्या पर पड़ रहा है. विद्यार्थियों को जान हथेली पर रखकर पढ़ाई करनी पड़ रही है.
गोंदिया नगर परिषद क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा मिले, इसीलिए नगर परिषद द्वारा 20 विद्यालय चलाई जा रही है. इनमें से कुछ विद्यालय अतीत में प्रसिद्ध हुए. इन स्कूलों ने कई उच्च पदस्थ अधिकारी, सफल उद्यमी, व्यवसायी पैदा किए हैं. लेकिन आज ये स्कूल इमारत खतरनाक हो गए हैं. स्कूल की आधी छतें टूट चुकी हैं. दीवारें टूट गई हैं और कुछ कक्षाओं की छतें टपक रही हैं. जर्जर दीवारों के कारण स्कूल में विद्यार्थियों की जान खतरे में है. ऐसे में शिक्षक भी जान हथेली पर लेकर छात्रों को शिक्षा दे रहे हैं. बताया जाता है कि इमारत के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव एक वर्ष पूर्व नगर परिषद के शिक्षा विभाग को सौंपा गया था, जिसे अब तक मंजूरी नहीं मिल पायी है. परिणामस्वरूप यह है कि स्कूल इमारतों की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है. स्कूलों की खराब हालत के कारण छात्रों के अभिभावकों ने इन स्कूलों से मुंह मोड़ लिया है. कक्षा में विद्यार्थियों के बैठने के लिए पर्याप्त बेंच नहीं हैं. उखडे हुए प्लास्टर, टूटे दरवाजे, टपकती कक्षाएं, टूटी हुई टाइल्स छात्रों के लिए पढ़ाई करना मुश्किल कर देती हैं. छात्रों की उपस्थिति कम हो रही है क्योंकि मानसून के दौरान कक्षा में बैठना खतरनाक है. छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा भी एजेंडे में है. पूर्व में स्कूल की मरम्मत के लिए समय-समय पर लाखों की धनराशि आने के बावजूद स्कूल की हालत में तनिक भी बदलाव नहीं आया है. इसलिए विद्यार्थियों को इसी जर्जर इमारत में शिक्षा ग्रहण करनी पड़ती है.

रामनगर स्कूल की स्थिति चिंताजनक
रामनगर नप स्कूल की स्थापना वर्ष 1965 में हुई थी. यहां 5वीं से 10वीं तक की कक्षाएं हैं और यहां 200 से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं. लेकिन स्कूल का 10वीं कक्षा का रिजल्ट 95 प्रतिशत रहा है, लेकिन हर साल मानसून के मौसम में छात्र और शिक्षक डरे रहते हैं. क्योंकि कक्षाओं की छतें टूट चुकी हैं. जिससे पहले भी कई बार छात्रों के क्लास में रहने के दौरान स्लैब के हिस्से गिरे थे. सौभाग्य से कोई दुर्घटना नहीं हुई. छत टपकने से पानी छात्रों पर गिरता है और किताबें भीग जाती हैं. स्कूल में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. लेकिन विद्यालय इमारत जर्जर है और भय के साये में पढ़ाई हो रही है.

नप प्रशासन की लापरवाही
रामनगर स्कूल का भवन जर्जर हो चुका है और छात्रों को जर्जर इमारत में पढ़ाई करनी पड़ रही है. इमारत की मरम्मत को लेकर अक्सर पत्राचार का आदान-प्रदान होता रहता है. लेकिन नगर परिषद प्रशासन इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं है. यही हाल अन्य स्कूलों का भी है.

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments