गोंदिया. गोंदिया जिले में सीएमआर चावल की जमाखोरी के मामले की जांच की जाएगी. साथ ही, इस मामले में जिला आपूर्ति अधिकारी की भी एसीबी विभाग के माध्यम से जांच की जाएंगी., ऐसी जानकारी उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने विधानसभा में दी. सदस्य नाना पटोले ने गोंदिया जिले में सीएमआर चावल की जमाखोरी को लेकर एक दिलचस्प सुझाव दिया था. वह उस समय बोल रहे थे.
राज्य मंत्री योगेश कदम ने इस मौके पर जानकारी देते हुए कहा कि साल 2023-24 के लिए जरूरी एफआरके आपूर्ति की जरूरत पूरी हो गई है, और कुल 2,435 मीट्रिक टन एफआरके की जरूरत पूरी हो गई है. 2021-22 में केंद्र सरकार की टीम द्वारा किए गए जांच में कुछ गड़बड़ियां पाई गई थीं. उसके बाद, संबंधित चावल को अयोग्य घोषित करके गोदाम में जमा कर दिया गया. लेकिन, जिलाधीश के जांच के बाद रिपोर्ट दी गई कि चावल सही है. मामला अभी न्यायालय में है क्योंकि संबंधित राइस मिल मालिकों ने इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है. न्यायालय का आखिरी फैसला आने तक इस चावल का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.
इसी दौरान, 29 जुलाई 2025 को एक मंत्री स्तरीय बैठक हुई थी. उस बैठक में चावल की क्वालिटी की दोबारा जांच करने के निर्देश दिए गए थे. उन्होंने कहा कि मिली रिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि चावल इंसानों और जानवरों दोनों के खाने के लिए सही नहीं है, और नियमों के मुताबिक इसे डिस्पोज करने की प्रक्रिया शुरू की जाएंगी. राज्य मंत्री कदम ने कहा कि एक ही जिले में तहसील व जिला स्तर पर आपूर्ति अधिकारी की लंबे समय तक नियुक्ति की जांच की जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि जब संबंधित अधिकारी पर आरोप हों तो उन्हें कई सालों तक एक ही जगह पर रखना ठीक नहीं है, और ऐसे अधिकारी को सही जगह पर स्थानांतरण करने के लिए निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी.
गोंदिया के अधिकारी की एसीबी विभाग के माध्यम से जांच करेगें : उपमुख्यमंत्री पवार
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