गोंदिया. पिछड़े वर्ग के लोगों पर होने वाले अत्याचारों को रोकने और उन्हें सामाजिक न्याय दिलाने के लिए एट्रोसिटी एक्ट बनाया गया है. एट्रोसिटी अपराधों में सजा की दर बढ़ाने में आने वाली मुश्किलों को संबंधित विभाग प्राथमिकता से संभाले. ऐसे निर्देश जिलाधीश डॉ. मंगेश गोंदावले ने जिलाधीश कार्यालय के सभागृह में जिला दक्षता व नियंत्रण समिति आयोजित सभा में दिए. सभा में समाज कल्याण सहायक आयुक्त किशोर भोयर, पुलिस अधीक्षक के प्रतिनिधि पुरुषोत्तम अहेरकर, जिला सूचना अधिकारी अंजू कांबले-निमसरकर, विधी अधिकारी मिलिंद चवरे और नागरी हक संरक्षण टीम के प्रतिनिधि उत्तम दहीवले उपस्थित थे.
जिलाधीश ने कहा कि स्थानीय क्राइम ब्रांच जिला शासकीय अभियोक्ता के साथ समन्वय करके पुलिस जांच के तहत आने वाले अपराध को न्यायालय से निकलवाए. पुलिस थाना डुग्गीपार में पीड़ित महिला का जाति प्रमाणपत्र बनाने के लिए जरूरी कार्रवाई प्राथमिकता से की जाए. पुलिस थाना आमगांव में मृतका का जाति प्रमाणपत्र बनाने के बारे में उप विभागीय अधिकारी देवरी को पत्र भेजकर बताया जाए. उन्होंने इस दौरान यह भी निर्देश दिए कि आमगांव में मृतका का नाम लिखकर सुधारित पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाने के बारे में संबंधित वैद्यकीय अधिकारी को लिखित में बताया जाए.
इसके बाद, समिति सदस्य सचिव किशोर भोयर ने सभा के सामने मई 2026 तक पुलिस विभाग को मिले कुल अपराधों की स्थिति, पुलिस जांच के तहत अपराध की स्थिति, पुलिस फाइनल अपराध की स्थिति, न्यायालय में लंबित अपराध की स्थिति और आर्थिक मदद के लिए लंबित अपराध की स्थिति प्रस्तुत किया. आर्थिक वर्ष 2026-27 में मई 2026 तक कुल 9 अपराध हुए हैं, यानी हत्या -2, हत्या की कोशिश-0, दुष्कर्म -0, छेड़छाड़-2, मारपीट/गंभीर चोट-1, आगजनी-0, गाली-गलौज-2 और अन्य -2 का समावेश है. इनमें से 6 अनुसूचित जाति और 3 अनुसूचित जनजाति के अपराध हैं. इन अपराधों में से 9 पुलिस जांच में हैं. 2025-26 में हुए कुल 56 अपराध में से 51 न्यायालय में लंबित हैं, 4 पुलिस ने फाइनल कर दिए हैं, और 1 अपराध पुलिस जांच में है. यह जानकारी सभा में दी गई.



