गोंदिया. गोरेगांव पंचायत समिति अंतर्गत बोरगांव ग्राम पंचायत के सरपंच व सचिव ने ऑटो स्विच खरीदी में घोटाला किया है। घोटाला करने वाले सरपंच व सचिव के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए ,इस मांग को लेकर 12 मार्च को ग्राम पंचायत सदस्य विनयराज मेश्राम व राहुल राहंगडाले ने पानी की टंकी पर चढ़कर आंदोलन शुरू कर दिया था। आंदोलन की जानकारी मिलते ही प्रशासन में खलबली मच गई थी। जिसके बाद गोरेगांव पंचायत समिति के बीडीओ, पुलिस निरीक्षक तथा उनकी टीम घटनास्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारीयो को कार्रवाई का आश्वासन देते हुए पानी की टंकी से उतारा। लेकिन इस मामले में सरपंच सचिव पर किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं की गई , बल्कि आंदोलनकारीयो पर गोरेगांव पुलिस पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है
बता दे की गोरेगांव पंचायत समिति अंतर्गत बोरगांव ग्राम पंचायत आती है। जहां पर मनीषा चोपकर सरपंच पद पर विराजमान है, वही सचिव पद पर एस एस गौतम कार्यरत है । आरोप है कि सचिव व सरपंच ने मिली भगत कर ऑटो स्विच खरीदी मे अधिक राशि का बिल बनाकर घोटाला किया है। इस मामले की जांच हेतु ग्राम पंचायत के सदस्य विनयराज मेश्राम , सामाजिक कार्यकर्ता राहुल राहंगडाले ने पंचायत समिति व मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद गोंदिया से लिखित शिकायत की, शिकायत के आधार पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मामले की जांच की गई थी ।जांच में सचिव व सरपंच को दोषी माना गया। कार्यवाई के तौर पर अधिक राशि का बिल बनाने पर अतिरिक्त राशि वसूल करने के आदेश दिए गए । आदेश के तहत सरपंच, सचिव ने राशि जमा की । उसके बाद इस मामले की फाइल को बंद कर दिया गया ।
लेकिन ग्राम पंचायत सदस्य विनयराज मेश्राम व राहुल रंहागडाले ने आरोप लगाते हुए कहा कि उपरोक्त सरपंच और सचिव के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए जिसमे सरपंच को अपात्र वही सचिव को निलंबित किया जाए ।
इसी मांग को लेकर 12 मार्च को पानी के टंकी पर चढ़कर आंदोलन शुरू कर दिया गया था। आंदोलन की जानकारी मिलते ही पंचायत समिति के गुट विकास अधिकारी शुभम जाधव व गोरेगांव पुलिस थाने की टीम घटनास्थल पर पहुंचकर सचिव व सरपंच पर कार्रवाई करने का आश्वासन देते हुए दोनों आंदोलनकारीयो को पानी की टंकी से नीचे उतारा गया, लेकिन अभी तक सचिव व सरपंच के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं की गई है । और आंदोलन कार्यक्रम पर गोरेगांव पुलिस ने मामला दर्ज किया है।
आंदोलनकारियों पर मामले दर्ज, लेकिन सरपंच, सचिव पर कार्यवाही नहीं
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