Friday, April 24, 2026
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कुंभारटोला के जंगल में लगी आग, बहुमूल्य वन संसाधन जलकर नष्ट, पशुधन की हानि

गोंदिया. महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की सीमा पर देवरी तहसील के कुंभारटोला (मुरपार) के जंगल में आग लगने के कारण बहुमूल्य वन संपदा नष्ट होने के कगार पर है. वन अधिकारियों की अनियमित गश्त के कारण बहुमूल्य वन संपदा राख में तब्दील हो रही है. प्रकृति प्रेमियों में इस बात को लेकर काफी रोष है कि वन विभाग ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है. यह एक प्राकृतिक आपदा है या किसी व्यक्ति का काम है. इसकी जांच होनी चाहिए. यदि जंगल के पीछे कोई मानवीय हस्तक्षेप है तो उसे पकड़कर कड़ी सजा दी जानी चाहिए, ऐसी मांग प्रकृति के मित्र ने की है. वनों की कटाई के कारण जंगल में रहने वाले कीड़े-मकौड़े, पशु-पक्षी और औषधीय पौधे नष्ट हो रहे हैं. इसके लिए वन अधिकारी को यथासंभव गश्त बढ़ानी चाहिए तथा वनों में आग लगने से रोकना चाहिए. यह प्रकृति प्रेमियों की वन विभाग से गुहार है.
जानकारी के अनुसार देवरी तहसील के भारेगांव बीट के अंतर्गत कुंभारटोला (मुरपार) गांव के जंगल में आग लग गई, जिससे कीट, पक्षी, पौधे और वन औषधियों सहित बहुमूल्य वन संसाधन नष्ट हो गए. जैसे-जैसे गर्मी के महीने नजदीक आते हैं, महुआ फुल वृक्ष खिलने लगता है और जंगल में वनों की संख्या बढ़ती जाती है. यदि वन अधिकारी इस मौसम में गश्त के घंटे बढ़ा दें तो वनों को कटाई से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है. जंगल में रहने वाले जानवरों, कीड़ों और छोटे पौधों का जीवन भी बचाया जा सकता है. जंगल में आग प्राकृतिक और मानव निर्मित दोनों हो सकती है, और वर्तमान में अधिकांशतः जंगल में आग लगने के पीछे मनुष्य ही होते हैं. कई स्थानों पर वन विनाश के कगार पर हैं, क्योंकि ऐसी आग से सरीसृप, पक्षी और जानवरों का भोजन नष्ट हो जाता है, तथा पेड़ और झाड़ियां जल जाती हैं. लेकिन, ऐसा प्रतीत होता है कि वन विभाग ऐसी घटनाओं को रोकने और वन संसाधनों की रक्षा करने में विफल रहा है. वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि वन विभाग को इस मामले पर गौर करना चाहिए.
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किसानों में यह गलत धारणा है कि घास को जलाने से घास अच्छी तरह उगती है. लेकिन, इस बारे में जागरूकता पैदा करना जरूरी है कि अगर इसे नहीं जलाया जाए तो इसके बीज नष्ट हो जाते हैं और यह केवल अंकुरित होती है. साथ ही, सरकार को कुछ सालों तक उन गांवों को फंड नहीं देना चाहिए जहां जंगल में आग लगाई जा रही है. अगर ऐसा किया जाता है, तो लोग अपने-अपने गांवों में जंगल में आग के खिलाफ सावधानी बरतेंगे और अगर गलती से आग लग जाती है, तो वे जनभागीदारी से इसे नियंत्रित करेंगे. जिससे वन्यजीवों को विलुप्त होने से बचाने में मदद मिलेगी, अन्यथा अगर ऐसा ही चलता रहा, तो जीवों का विनाश होने में देर नहीं लगेगी.
शैलेश रांजनकर, प्रकृति मित्र

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