Wednesday, April 29, 2026
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गोंदिया-डोंगरगढ चौथी रेललाईन के साथ तीन मल्टी-ट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को मिली मंजूरी

गोंदिया. केंद्र के कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति, जिसकी अध्यक्षता प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने की है,ने आज भारतीय रेलवे मंत्रालय की चार परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनकी कुल लागत लगभग ₹24,634 करोड़ है।
इन परियोजनाओं में शामिल हैं- जिसमे वर्धा – भुसावल तीसरी और चौथी लाइन – 314 किमी (महाराष्ट्र)
गोंदिया – डोंगरगढ़ चौथी लाइन – 84 किमी (महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़),वडोदरा – रतलाम तीसरी और चौथी लाइन – 259 किमी (गुजरात और मध्य प्रदेश) एंव  इटारसी – भोपाल – बीना चौथी लाइन – 237 किमी (मध्य प्रदेश) का समावेस है.
ये चार परियोजनाएँ महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और छत्तीसगढ़ के 18 जिलों में फैली हुई हैं और इससे भारतीय रेलवे का मौजूदा नेटवर्क लगभग 894 किलोमीटर बढ़ जाएगा।मंजूर की गई मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 3,633 गांवों को रेल संपर्क मिलेगा, जिनकी आबादी लगभग 85.84 लाख है, और इनमें दो अभिलाषी जिले (विदिशा और राजनांदगांव) भी शामिल हैं।
लाइन क्षमता बढ़ने से परिचालन क्षमता में सुधार होगा और भारतीय रेलवे की सेवा विश्वसनीयता बढ़ेगी। ये परियोजनाएँ परिचालन को सुगम बनाने और रेल मार्गों पर जाम को कम करने में मदद करेंगी।
ये परियोजनाएँ प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के “नई भारत” दृष्टिकोण के अनुरूप हैं, जिससे क्षेत्र के लोग आत्मनिर्भर बन सकेंगे और रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।ये परियोजनाएँ पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत, मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने पर केंद्रित हैं। इसके माध्यम से लोगों, माल और सेवाओं के सुचारू और तेज़ परिवहन की सुविधा मिलेगी।
परियोजनाओं से प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे सांची, सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व, भिंबेटका के रॉक शेल्टर,हजारा जलप्रपात, नौवागांव नेशनल पार्क आदि तक बेहतर रेल संपर्क मिलेगा, जिससे देश भर से पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकेगा। यह मार्ग कोयला, कंटेनर, सीमेंट, फ्लाई ऐश, अन्न, स्टील आदि जैसे माल के परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। लाइन क्षमता बढ़ाने के काम से लगभग 78 मिलियन टन प्रति वर्ष अतिरिक्त माल परिवहन संभव होगा। रेल परिवहन पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल है, जिससे जलवायु लक्ष्य प्राप्त करने,लॉजिस्टिक लागत घटाने, तेल आयात (28 करोड़ लीटर) कम करने और CO2 उत्सर्जन (139 करोड़ किग्रा) घटाने में मदद मिलेगी, जो लगभग 6 करोड़ पेड़ों के रोपण के बराबर है।

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