ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई

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स्वास्थ्य कर्मचारियों का आंदोलन जारी
गोंदिया. एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत स्वास्थ्य कर्मचारियों को शासकीय सेवा में समाविष्ट करने की प्रमुख मांग को लेकर राज्य के साथ ही जिले के सभी एनएचएम कर्मचारियों ने पिछले 25 अक्टूबर से कामबंद आंदोलन शुरू किया है. स्वास्थ्य कर्मचारियों के आंदोलन के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका विपरित प्रभाव पड़ रहा है. इसी दौरान कर्मचारियों ने अपनी मांग को लेकर 30 व 31 अक्टूबर को मुंबई के आजाद मैदान में भी आंदोलन किया था. जिस पर संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री तानाजी सावंत ने मंत्रिमंडल की आगामी बैठक में इस विषय पर निर्णय लेकर चरणबद्ध तरीके से एनएचएम कर्मियों को शासकीय सेवा में समाविष्ट करने का आश्वासन दिया. इसके बावजूद कर्मचारियों का कामबंद आंदोलन जारी है. आंदोलनकारी कर्मचारियों का कहना है कि जब तक इस संबंध में शासकीय परिपत्रक (जीआर) जारी नहीं होता तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा.
उल्लेखनीय है कि पिछले 17 वर्षों से राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान चलाया जा रहा है. इसके अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सा अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक संविदा आधार पर काम कर रहे है. जिसके बदले उन्हें अपेक्षा से काफी कम मानधन दिया जाता है. वर्षों से यह कर्मचारी उन्हें नियमित शासकीय सेवा में समाविष्ट किए जाने की मांग करते आ रहे है. इसके लिए कई बार उन्होंने आंदोलन भी किए. लेकिन इस संबंध में कोई सकारात्मक निर्णय शासन की ओर से नहीं लिया गया. जिसके कारण पिछले 11 दिनों से यह आंदोलन चल रहा है. समायोजन कृति समिति के मार्गदर्शक दिलीप उठाने, डा. अरुण कोली, प्रविण बोरकर, राज्य समन्वयक पवन वासनिक के नेतृत्व में मुंबई में आंदोलन किया गया. गोंदिया जिला परिषद प्रशासकीय इमारत के सामने भी पिछले 12 दिनों से लगातार एनएचएम कर्मचारियों का आंदोलन चल रहा है. इस बीच समायोजन कृति समिति के राज्य समन्वयक पवन वासनिक ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री तानाजी सावंत ने उनके प्रतिनिधि मंडल को आश्वासन दिया है कि चरणबद्ध तरीके से एनएचएम कर्मचारियों को शासकीय सेवा में समाविष्ट किया जाएगा. लेकिन जब तक शासन के इस निर्णय के संबंध में जीआर जारी नहीं हो जाता तब तक कामबंद आंदोलन शुरू रखने का निर्णय संगठन द्वारा लिया गया है. उन्होंने बताया कि हमारी प्रमुख मांगों में एनएचएम कर्मचारियों को वर्ष 2026 तक चरणबद्ध तरीके से शासकीय सेवा में समाविष्ट करना, जब तक सभी कर्मचारियों का समायोजन नहीं हो जाता तब तक कर्मचारियों को समान काम, समान वेतन, की निती के अनुसार वेतन देने व अभियान में कार्यरत कर्मचारियों के लिए स्पर्धा परीक्षा अथवा आयु सीमा की मर्यादा लागू न करने की मांग का समावेश है.

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