छोटे-मोटे काम भी बंद : महिला सदस्य का आंदोलन शुरू
गोंदिया. सालेकसा तहसील नक्सल प्रभावित, पिछड़ा और आदिवासी है. सरकार इस तहसील के लिए अपार धनराशि अनुदान देती है. लेकिन वह पैसा सिर्फ दस्तावेजों पर ही खर्च किया जाता है. इस बीच जिला परिषद सदस्य विमल कटरे ने आरोप लगाया कि जिला परिषद का सत्ताधारी दल भी पक्षपातपूर्ण नीति अपना रहा है. अपने तिरखेड़ी क्षेत्र में आने वाले साखरीटोला को तिरखेड़ी की सड़क पर चलना मुश्किल हो गया. इस सड़क की मरम्मत व निर्माण के लिए कई बार आंदोलन भी हुए. कम से कम गड्ढे तो भरने चाहिए, जिला परिषद को काम शुरू करने का आदेश देना चाहिए. धानोली से बाह्मनी सड़क निर्माण के लिए रेलवे प्रशासन द्वारा एक वर्ष पूर्व अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के बाद भी सड़क का निर्माण पूरा नहीं हुआ. उस सड़क निर्माण के लिए धनराशि बढ़ाई जाए. जिप में व्यक्तिगत और विकासात्मक कार्यों को जानबूझकर रोक दिया जाता है. विमल कटरे ने जिला परिषद को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि उन कार्यों की जिम्मेदारी तय की जाए. 18 सितंबर तक मांगें मंजूर न होने पर 19 सितंबर से भूख हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी थी. लेकिन जिप द्वारा कोई जवाब नहीं देने पर आखिरकार 19 सितंबर से विमल कटरे व पंचायत समिति सदस्य रेखा फुंडे ने जिला परिषद के सामने भुक हड़ताल आंदोलन शुरू कर दिया. इस दौरान बबलू कटरे, सरपंच उर्मीला कटरे, उपसरपंच शामू मेश्राम, रेखा सयाम, होमेंद्र कटरे, अभय कुरंजेकर, विजय कटरे, झामसिंह कटरे, भाऊलाल दिहारी, नरेश बघेले, गजानन मेश्राम, प्रल्हाद दिहारी, गोरेलाल बिसेन, मूलचंद सयाम, द्वारकाप्रसाद बघेले, संतोष बघेले, गवरचंद कटरे, शामा दिहारी, जीतेंद्र भोई, गुलाब फुलबांधे, राजीव ठकरेले, पंकज चौधरी, नीलम हलमारे ने आंदोलन को समर्थन दिया.



