दोषी पति को 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा

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पति की दहेज प्रताडऩा से तंग आकर कुएं में कुदकर  विवाहित ने की थी आत्महत्या
गोंदिया. विवाह के उपरांत अपनी पत्नी का विशेष ध्यान रखना, तथा दहेज जैसी मांग के लिये पत्नी को परेशान नहीं करना यह प्रत्येक विवाहित पति का धर्म और कत्र्तव्य है, परंतु समाज में आज भी दहेज लोधी लोगों परिवारों की प्रताडऩा को भोगने के लिये अनेक विवाहिता मजबूर है, लेकिन कहते हैं कि देर से ही सहीं, जब कोई अन्याय किसी विवाहिता या किसी के साथ भी किया जाता है, तो उसकी सजा कानुन और कानुन के साथ साथ ईश्वर का न्याय भी करता है। एैसा ही एक मामले में न्यायालीय कार्यवाही के उपरांत दोषी पति के साथ हुआ, जिसमें आरोपी पति के दोषी साबित होने पर माननीय न्यायालय ने दोषी पति को १० वर्ष के कारावास की सजा के साथ ही आर्थिक दंड की सजा भी दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम भंगाराचौक गोरेगाव में घटना दिनांक सन 2013 से दिनांक- 06/06/2016 के शाम ५.30 बजे के दरम्यान आरोपी – 1) लिखेंन्द्र धनलाल कटरे उम्र 31 वर्ष, 2) धनवंताबाई बे. कटरे उम्र 66 वर्ष तथा 3) ओमेश्वरी ज्ञानेश्वर पटले उम्र 32 वर्ष तीनों ही निवासी भंगाराम चौक गोरेगाव ने एक राय होकर फर्यादी की बेटी ज्योती कटरे, को प्रताडि़त कर ताने मारकर 50,000 हजार रुपये का दहेज नहीं लाने के चलते शारीरिक व मानसिक रुप से प्रताडि़त किया, जिस पर परेशान होकर मृतिका ने दिनांक 06/06/2016 को शाम ५.30 बजे लगभग हिरडामाली मार्ग रेल्वे स्टेशन परिसर के कुएं में कुदकर आत्महत्या कर ली, जिसके बाद आरोपी पति एवं उसके परिवार के खिलाफ मृतिका के पिता की रिपोर्ट पर पो.स्टे.- गोरेगाव में अप. क्र.-39/2016 धारा – 304(ब), 498(अ), 34 भा.द.वि. के तहत दिनांक 11/06/2016 को 22.32 बजे अपराध दर्ज किया गया।
माननीय वरिष्ठों के मार्गदर्शन के उपरांत जांच कार्यवाही के उपरांत दोषारोप पत्र के साथ माननीय न्यायालय के समक्ष प्रकरण प्रस्तुत किया गया, जिस पर मा. न्यायालय ने केस क्रमांक 97/2017 के संबंध में सुनवाई की, जिसमें न्यायालयीन प्रक्रिया में युक्तिवाद के उपरांत गुनाह के आरोपी के खिलाफ दोष सिद्घ हुआ, तदुपरांत प्रमुख जिला व सत्र  न्यायधिश मा.वानखेडे की अदालत द्वारा इस प्रकरण में फैसला करते हुए दिनांक 15/04/2024 को आरोपी क्रमांक 1 के खिलाफ धारा 304 के तहत 10 वर्ष कारावास व कलम 498  के महत 3 वर्ष कारावास व 2000 दंड व आरोपी क्र 2, 3 को निर्दोष बरी किया। इस अपराध में जांच अधिकारी सपोनि मनिष बन्सोड, पो.स्टे. गोरेगाव एवं न्यायालयीन कामकाज सरकारी वकील खंडेलवाल ने विधिवत कार्यवाही की। कोर्ट पैरवी में पो. हवा. प्रकाश शिरसे, ने विशेष योगदान दिया।

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