ब्राह्मणों को सदैव अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए : वीरेंद्र अंजनकर

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समग्र ब्राह्मण सभा का भगवान परशुराम जन्मोत्सव कार्यक्रम
समाज के पुजारियों- पुरोहितों का सम्मान

गोंदिया: भारत देवभूमि है। इस पवित्र भूमि पर देवी-देवताओं, साधु-संतों, महान समाज सुधारकों ने जन्म लिया है। ब्राह्मणों ने आज भी अपनी संस्कृति और परंपराओं को बचाकर रखा है। वे राष्ट्रहित, राष्ट्र निर्माण के लिए निरंतर कार्य करते हैं। लेकिन कुछ समाज द्रोहियोने हमेशा ब्राह्मणों की छवि को धूमिल करने का काम किया है। ब्राह्मणों को ऐसे कृत्यों से बिना डरे नियमित रूप से अपने कर्तव्यों का पालन करते रहना चाहिए, उक्ताशय के विचार पं. वीरेन्द्र (बालाभाऊ) अंजनकर ने किया।
वे समग्र ब्राह्मण सभा के स्थानीय महिला मंडल सभागृह के प्रांगण में 10 मई को आयोजित भगवान परशुराम जन्मोत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। समग्र ब्राह्मण सभा के संयोजक नीलेश चौबे की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में मंच पर अरुण दुबे, देवेश मिश्रा उपस्थित थे। इस अवसर पर स्व. पं. अनिल शिवकुमार दुबे की स्मृति में समाज के पुजारियों एवं पुरोहितो का सम्मान किया गया।
आगे अपने संबोधन में अंजनकर ने भगवान परशुराम द्वारा दिखाए गए मार्ग का अनुसरण करने की बात कहते हुए समाज के सदस्यों को सदैव ज्ञान प्राप्त करना चाहिए, अर्जित ज्ञान दूसरों में बाटना चाहिए, देवी-देवताओं की नियमित पूजा करना, दान करना, प्रतिग्रह करना आदि के बारे में व्यापक मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम की प्रस्तावना में नीलेश चौबे ने समग्र ब्राह्मण सभा की प्रगति एवं भविष्य के कार्यों एवं योजनाओं के बारे में बताया तथा समाजजनों से एकजुट होकर सहयोग करने की अपील की। अरुण दुबे ने अपने संबोधन में उनके भाई स्व. अनिल दुबे के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे एक सफल उद्यमी थे तथा हमेशा समाज में सक्रिय भूमिका निभाया करते थे। इसके साथ ही, समाज के सदस्यों को निमंत्रण की प्रतीक्षा किए बिना हमेशा समाज के कार्यक्रमों उपक्रमो में सहभागी होने के लिए कहा। इस मौके पर देवेश मिश्रा ने भी मार्गदर्शन करते हुए कहा कि पंडित, पुजारी, पुरोहित हमारी संस्कृति और सभ्यता के वाहक हैं और हमारी विरासत हैं। इस अवसर पर पुजारियों को मान्यवरों के द्वारा स्मृति चिन्ह, श्रीफल एवं उपहार देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन जयंत शुक्ला ने किया। अतुल दुबे ने आभार माना। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोग सहभागी हुए। कार्यक्रम का समापन महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ। कार्यक्रम की सफलता में महाराष्ट्रीयन ब्राह्मण, उत्तर भारतीय ब्राह्मण, गुजराती ब्राह्मण, राजस्थानी ब्राह्मण, पंजाबी ब्राह्मण, मैथली ब्राह्मण, सिंधी ब्राह्मण, दक्षिण भारतीय ब्राह्मण, बंगाली ब्राह्मण, उड़िया ब्राह्मण ने सहयोग दिया।

आकर्षक का केंद्र थी भव्य शोभायात्रा
जन्मोत्सव के अवसर पर शाम को भगवान परशुराम की पूजा-अर्चना कर महिला मंडल सभागृह से शोभायात्रा निकाली गई। ढोल-नगाड़े, बैंड-बाजे, मनमोहक विविध झांकी, भगवान के रथ, बग्गियां और डीजे की धुनों पर नाचते युवा और बुजुर्ग सभी का ध्यान आकर्षित कर रहे थे। शोभायात्रा के दौरान अनेक सेवाभावी संगठनों द्वारा शितपेय की व्यवस्था की गई थीं। विशेष रूप से जन्मोत्सव की पूर्व संध्या पर भगवान परशुराम जी के मंदिर से शहर के मुख्य मार्ग पर भव्य दोपहिया वाहन रैली निकाली गयी थी। महिला मंडल सभागृह परिसर में हनुमान चालीसा एवं भक्ति संगीत कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था।

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