गोंदिया. राष्ट्रीय मजदूर सेना की ओर से 20 फरवरी को तहसील कार्यालय के सामने शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय की संविधा कर्मि पल्लवी रामटेके व राजेश गजभिये को काम पर वापस रखने व विभिन्न मांगों को लेकर एक दिवसीय आंदोलन किया गया. इस दौरान मांगों का ज्ञापन तहसीलदार के माध्यम से स्वास्थ्य मंत्री को भेजा गया.
संविधा कर्मि पल्लवी रामटेके व राजेश गजभिये स्मार्ट सर्विसेस प्रा.लि. के तहत शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व केटीएस जिला सामान्य अस्पताल में वार्ड बॉय व सफाई कर्मचारी के रुप में काम कर रहे हैं. स्मार्ट सर्विसेस ने पिछले 3 माह का वेतन व एनर्जी ग्रोव कंपनी ने दो माह 10 दिन का वेतन नहीं दिया है. जिसके लिए 13 जनवरी को शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय के आगे आंदोलन किया गया था. उसके बाद अधिष्ठाता डा. कुसुमाकर घोरपडे के साथ चर्चा के दौरान दो माह का वेतन आठ दिनों में सभी कामगारों को दिया गया. एनर्जी ग्रोव कंपनी के दो माह दस दिनों का वेतन आज तक नहीं दिया गया है. कर्मियों ने आंदोलन करने पर ठेकेदार ने कर्मियों को आर्थिक व मानसिक परेशान करना शुरू कर दिया. वहीं पल्लवी रामटेके और राजेश गजभिये को नियमानुसार कोई कार्रवाई किए बिना अवैध रूप से काम से निलंबित कर दिया गया है. क्या कामगारों के लिए अन्याय का विरोध करना अपराध है? स्मार्ट सर्विसेज के वरिष्ठ अधिकारी और सफाई निरीक्षक धमकी दे रहे हैं कि अगर कर्मचारी यूनियन बनाकर विरोध करेंगे तो उन्हें काम से स्थायी रूप से निलंबित कर दिया जाएगा. जिन श्रमिकों को काम से हटा दिया गया है, उन्हें तुरंत पूर्ण वेतन के साथ वापस काम पर रखा जाए, आदि विभिन्न मांगों को लेकर 20 फरवरी को दोपहर 1 बजे तहसील कार्यालय के आगे राष्ट्रीय मजदूर सेना के विदर्भ प्रदेश अध्यक्ष विजय पाटिल के नेतृत्व में आंदोलन किया गया.
विभिन्न मांगों को लेकर राष्ट्रीय मजदूर सेना का आंदोलन, तहसीलदार के माध्यम से स्वास्थ्य मंत्री को भेजा ज्ञापन
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