समर कैंप में विद्यार्थियों ने एआई से लेकर पारंपरिक कलाओं का प्रशिक्षण
गोंदिया. देवरी में एकात्मिक आदिवासी विकास प्रकल्प के तहत आयोजित ग्रीष्मकालीन शिविर के समापन कार्यक्रम में जिलाधीश डा. मंगेश गोंदावले ने कहा कि इस तरह के शिविर आदिवासी विद्यार्थियों के लिए करियर के नये अवसर प्रदान कर रहे हैं. इस शिविर में विद्यार्थियों को एक माह तक विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण दिया गया. इसमें गोंडी पेंटिंग, मेहंदी, क्ले आर्ट, बॉटल आर्ट, रंगोली, पेंटिंग, बांस शिल्प के साथ-साथ एआई और रोबोटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया. शिविर शासकीय आश्रम शाला बोरगांव/बाजार में आयोजित किया गया. समापन कार्यक्रम अभिभावकों की उपस्थिति में हुआ. कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान, राज्यगान और गोंडी स्वागतगान से हुई.

जिलाधीश ने कहा कि यदि उचित मार्गदर्शन व प्रशिक्षण मिले तो आदिवासी क्षेत्र के विद्यार्थी भी मुख्यधारा में आकर देश के विकास में अपना योगदान दे सकते हैं. उन्होंने कहा कि यह उल्लेखनीय है कि इस शिविर के माध्यम से छात्रों को पारंपरिक संस्कृति के साथ-साथ आधुनिक कौशल सीखने का अवसर मिला. उन्होंने यह भी बताया कि ये कौशल छात्रों के लिए बाद के जीवन में करियर या शौक के रूप में उपयोगी होंगे. कार्यक्रम का उद्घाटन प्रकल्प अधिकारी उमेश काशिद ने किया. उन्होंने कहा कि सरकार आदिवासी छात्रों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और आश्रम स्कूलों में सकारात्मक बदलाव हो रहे हैं. समापन समारोह में छात्रों ने भरतनाट्यम, सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख नृत्य, भजन, भजन, आदिवासी नृत्य और संगीत प्रस्तुतियां दीं. इन प्रस्तुतियों से उपस्थित अभिभावक अभिभूत हो गए. विशेष आकर्षण के रूप में एयर शो का आयोजन किया गया. इसमें प्रतिकृति लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों के करतब दिखाए गए. साथ ही छात्र-छात्राओं ने मल्लखंब की कुशल प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया. कार्यक्रम के अंत में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को जिलाधीश द्वारा पुरस्कार व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया.
आदिवासी विद्यार्थियों के लिए समर कैंप से खुलते हैं करियर के नये अवसर : जिलाधीश डा. मंगेश गोंदावले
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