रानभाजियां प्रकृति का वरदान, रोजमर्रा के आहार में करें शामिल : मुनेश रहांगडाले

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गोंदिया में तालुकास्तरीय रानभाजी महोत्सव व पाककला स्पर्धा; 65 स्टॉलों पर पारंपरिक व्यंजनों की धूम, 35,430 रुपए की बिक्री

गोंदिया. कृषि तंत्रज्ञान व्यवस्थापन यंत्रणा (आत्मा) एवं कृषि विभाग गोंदिया के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को नवीन प्रशासकीय इमारत, जयस्तंभ चौक में तालुकास्तरीय रानभाजी महोत्सव एवं पाककला स्पर्धा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन पंचायत समिति गोंदिया के सभापति मुनेशजी रहांगडाले के हाथों बिरसा मुंडा की प्रतिमा का पूजन एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला परिषद की कृषि एवं पशुसंवर्धन सभापति दिपाताई चंद्रिकापुरे ने की। उद्घाटन अवसर पर मुनेशजी रहांगडाले ने कहा कि रानभाजियां प्रकृति का वरदान हैं। इनमें मौजूद औषधीय गुण स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक हैं। वर्षा ऋतु में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध होने वाली इन भाजियों को केवल महोत्सव तक सीमित न रखते हुए दैनिक आहार का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कृषि विभाग से रानभाजियों की वर्षभर उपलब्धता के लिए आवश्यक उपाय करने का भी आग्रह किया। कार्यक्रम में पंचायत समिति सदस्य शैलेजा सोनवाने, पंचायत समिति सदस्य जितेश्वरी रहांगडाले, आत्मा के परियोजना संचालक अजित आडसुळे, जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी निलेश कानवडे, आत्मा के परियोजना उपसंचालक रूपेश मेश्राम, उपविभागीय कृषि अधिकारी महेंद्र ठोकळे, नायब तहसीलदार तिवारी, तालुका कृषि अधिकारी नेहा आढाव सहित कृषि विभाग के अधिकारी, कर्मचारी, किसान, महिला बचत समूहों की सदस्य एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

नई पीढ़ी को रानभाजियों से जोड़ना जरूरी

आत्मा के परियोजना संचालक अजित आडसुळे ने कहा कि नई पीढ़ी को रानभाजियों का महत्व समझाने के उद्देश्य से प्रत्येक तहसील में ऐसे महोत्सव आयोजित किए जा रहे हैं। हमारे पूर्वज अपने भोजन में रानभाजियों को शामिल करते थे, जिससे उनका स्वास्थ्य अच्छा और शरीर मजबूत रहता था। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए भी इनका आहार में समावेश आवश्यक है। जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी निलेश कानवडे ने विभिन्न रानभाजियों की जानकारी देते हुए कहा कि इन पर प्रक्रिया कर वर्षभर उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रक्रिया उद्योग शुरू करने का लाभ किसानों एवं महिला समूहों को लेना चाहिए। पाककला परीक्षक प्रा. तेजेश्वरी टेंभरे ने कहा कि शरीर को आवश्यक प्रोटीन, खनिज एवं सूक्ष्म पोषक तत्व उपलब्ध कराने तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में रानभाजियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए इन्हें नियमित भोजन में शामिल करना चाहिए।

65 स्टॉलों पर दिखी रानभाजियों की विविधता

महोत्सव में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध रानभाजियों तथा उनसे तैयार किए गए विभिन्न खाद्य पदार्थों के करीब 65 स्टॉल लगाए गए थे। इनमें काटवल, सुरण, तरोटा, खापरखुटी, अंबाड़ी, सहजन, मटारू, घोळभाजी, कोचई के पत्ते, मशरूम, केना, पातुर भाजी सहित अनेक पारंपरिक रानभाजियां शामिल थीं। महिला किसानों के साथ ही महिला आर्थिक विकास महामंडल एवं ‘उमेद’ के बचत समूहों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता किया। स्टॉलों के माध्यम से रानभाजियों और उनसे तैयार खाद्य पदार्थों की बिक्री की गई। महोत्सव में कुल 35,430 रुपए का कारोबार हुआ.

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