Wednesday, February 18, 2026
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लोक अदालत में 6,900 मामलों का निपटारा, 8 करोड़ 34 लाख 44 हजार 426 रु. वसूले

गोंदिया. राष्ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण, सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली व महाराष्ट्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, उच्च न्यायालय मुंबई के निर्देशानुसार मध्यस्थता व सुलह के माध्यम से न्यायालयों में वर्षों से लंबित मामलों का तत्काल निपटारा करने के लिए जिला विधि सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष तथा प्रमुख जिला व सत्र न्यायाधीश आर.एन. जोशी व जिला विधि सेवा प्राधिकरण के सचिव एन.के. वालके के मार्गदर्शन में 13 दिसंबर को जिला विधि सेवा प्राधिकरण, जिला न्यायालय, गोंदिया व जिले की समस्त तहसील विधि सेवा समितियों के माध्यम से योग्य व न्याय-पूर्व मामलों के साथ-साथ बिजली व बैंकों के साथ-साथ जनोपयोगी न्याय-पूर्व मामलों के निपटारे के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया. उक्त लोक अदालत का उद्घाटन जिला विधि सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष व प्रमुख जिला व सत्र न्यायाधीश आर.एन. जोशी ने किया. जोशी ने उपस्थित लोगों को लोक अदालत के फायदे और अहमियत के बारे में बताया, जबकि एन.के. वालके ने ज्यादा से ज्यादा मामले सुलझाने की अपील की.
इस लोक अदालत में रखे गए न्यायालयीन लंबित मामलों में से 1,400 मामले समझौते से सुलझाए गए, जिनसे 6 करोड़ 54 लाख 78 हजार 935 रु. वसूले गए. न्यायालय में आए 14,669 मामलों में से 5,500 मामले सुलझाए गए, जिनसे 1 करोड़ 79 लाख 65 हजार 491 रु. वसूले गए. इस तरह, रखे गए कुल 19 हजार 890 मामलों में से 6,900 मामले सुलझाए गए और 8 करोड़ 34 लाख 44 हजार 426 रु. वसूले गए. इसी तरह, स्पेशल ड्राइव के तहत जिले न्यायालयों में कुल 215 फौजदारी मामले दायर किए गए, जिनमें से 201 मामले निपटाए गए. इससे पक्षकारों और दूसरे लोगों को मानसिक और आर्थिक परेशानी से राहत मिली. कई पक्षकारों ने खुशी जाहिर की. इस लोक अदालत की खास बात यह रही कि महावितरण के साथ-साथ बिजली, पानी, टेलीफोन, बैंक रिकवरी के पूर्व न्यायप्रविष्ठ मामलों में जिन पक्षकारों ने समझौते के मुताबिक बकाया की पूरी रकम संबंधित विभाग में जमा कर दी, उनके मामले हमेशा के लिए बंद कर दिए गए. इससे संबंधित विभाग और बकायादारों को भविष्य के कानूनी खर्च और मानसिक परेशानी से बचाया गया. उल्लेखनीय है कि दो जोड़ों ने नई जिंदगी शुरू की. साथ ही, दुर्घटना नुकसान भरपाई के 33 लंबित मामलों में बिमा कंपनियों ने 3 करोड़ 20 लाख 59 हजार रु. का मुआवजा मंजूर किया और पीड़ितों को उतनी रकम का फैसला सुनाया गया और उनके मामले आपसी सहमति से समझौता करके सुलझाए गए.

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