ढासगड़ जंगल में दिव्यांग गर्भवती महिला की हत्या करने वाले तीन आरोपियों को आजीवन कारावास

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मुख्य जिला व सत्र न्यायाधीश वानखेड़े का फैसला
गोंदिया. देवरी तहसील के ढासगड़ जंगल में दिव्यांग गर्भवती महिला की धारदार हथियार से गला काटकर हत्या करने वाले तीन आरोपियों को मुख्य जिला व सत्र न्यायाधीश वानखेड़े ने 29 जून को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. आरोपियों का नाम भंडारा जिले के लाखनी निवासी समीर अस्लाम शेख (26), बाबा मस्तानी निवासी आशिफ शेरखां पठान (38) व नागपुर जिले के उमरेड, डबा निवासी प्रफुल पांडुरंग शिवणकर (25) बताया गया है.
चिचगड़ थाने के तहत 23 जुलाई 2021 को रात 8 बजे तीन आरोपियों ने अज्ञात 25-30 वर्षिय दिव्यांग गर्भवती महिला की ढासगड़ जंगल में धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी तथा ढासगढ़ जाने वाली सड़क से 25 फीट की दूरी पर उसका शव फेंक दिया गया. फिर्यादी की शिकायत चिचगड़ पुलिस ने मामला दर्ज किया था. वरिष्ठों के मार्गदर्शन आरोपियों को भंडारा, बुटीबोरी से गिरफ्तार किया गया. मजबूत गवाह साक्ष्य, परिस्थितिजन्य साक्ष्य एकत्रित कर दोषारोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया. न्यायालय में उक्त मामले की सुनवाई के बाद जिला व सत्र न्यायाधीश वानखेड़े ने 29 जून को तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास व 10 हजार रु. जुर्माने की सजा सुनाई. उपराध की जांच पुलिस उपनिरीक्षक मनोहर इस्कापे की. आमगांव के सहायक उपविभागीय पुलिस अधिकारी जालिंदर नालकुल ने अतिरिक्त प्रभार संभाला. सरकार की ओर से एड. प्रणिता कुलकर्णी ने बाजू रखी. पैरवी सिपाही रिम्पी हुकरे ने की.

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