एयरपोर्ट के नाम पर जमीन : एयरपोर्ट प्रकल्प के पीड़ितों को बांटे पट्टे
गोंदिया. बिरसी हवाई अड्डा सुसज्जित है. उड़ानें शुरू हो गईं. पायलट ट्रेनिंग भी जारी है. जमीन का अधिग्रहण 2007 में किया गया था. लेकिन अभी भी बिरसी के 106 परिवारों का पुनर्वास नहीं हो सका है. आंदोलन के बाद 106 परिवारों को पट्टे दिए गए. उनमें से 30 परिवार नई बस्ती में भी चले गए. लेकिन वह जमीन अभी भी एयरपोर्ट अथॉरिटी के नाम पर है. इसलिए पुनर्वास के दौरान दिए गए पट्टों की अब तक रजिस्ट्री नहीं हो पाई है. अनुमान है कि इस मामले को सुलझाने में कम से कम एक साल लग जाएगा.
बिरसी का हवाई अड्डा अपने विस्तार के बाद से ही विवाद में रहा है. एयरपोर्ट अथॉरिटी ने पुनर्वास परिवारों के लिए कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई है. इसलिए हर साल कोई न कोई आंदोलन आज भी खड़ा हो जाता है. आजादी से पहले ब्रिटिश काल में बिरसी में हवाई अड्डा था. उस समय सीपी और बरार प्रांत के लिए बिरसी के हवाई अड्डे का ही उपयोग किया जाता था. लेकिन आजादी के बाद इस हवाई अड्डे पर कोई ध्यान नहीं दिया गया और केवल रनवे ही बचा रहा. प्रफुल पटेल के केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री बनने के बाद उन्होंने इस हवाई अड्डे का कायाकल्प करने की ठानी. हवाई अड्डे के विस्तार के साथ-साथ यहां एक पायलट प्रशिक्षण केंद्र भी स्थापित किया गया. यह हवाई अड्डा एक विशाल क्षेत्र में स्थित है. 2007 में एयरपोर्ट अथॉरिटी ने विस्तार के लिए बिरसी और आसपास की जमीन का अधिग्रहण किया था. जिन 106 परिवारों की जमीन अधिग्रहित की गई थी, उन्हें 2014 से पहले पुनर्वासित किया जाना आवश्यक था. लेकिन सरकार और प्रशासन की नीतियों के कारण अभी तक इस परिवार का पुनर्वास नहीं हो सका है. 2022 में आंदोलन तेज होने के बाद 106 परिवारों को प्लॉट आवंटित किए गए. लेकिन अभी तक उन पट्टों की जमीन की रजिस्ट्री पट्टेदारों के नाम से नहीं हो सकी है. इसलिए केवल 30 परिवार ही पुनर्वास स्थल पर आए. परिवार के बाकी सदस्य मिट्टी के घरों में रहते हैं. पुनर्वास का मुद्दा पिछले एक दशक से लंबित है. कोई भी मिट्टी का घर गिरने की स्थिति में है. जिससे इस परिवार के नागरिकों की जान खतरे में है. पहले भी कई बार पुनर्वास के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी और जिला प्रशासन के समक्ष यह मुद्दा उठाया गया था. लेकिन इसे लगातार नजरअंदाज किया गया. अब एयरपोर्ट से यात्री यातायात भी शुरू होने जा रहा है. जहां पुनर्वास किया जाना है वहां सड़क, नाली, बिजली, पानी की कोई सुविधा नहीं है. जिसके चलते संघर्ष समिति ने दोबारा आंदोलन करने का निर्णय लिया है.
इस प्रक्रिया में वर्ष लगेंगा
जो जमीनें पीड़ितों को वितरित की गईं. वह प्लॉट एयरपोर्ट अथॉरिटी के नाम पर है. यदि पीड़ितों के नाम पर भूमि का पट्टा करना है तो पहले राजस्व विभाग के नाम करना होगा. उसके बाद भूमि को नष्ट कर दिया जाएगा और प्रकल्प पीड़ितों को हस्तांतरित कर दिया जाएगा. इस प्रक्रिया में कम से कम एक साल लगेगा.
पहले भी कई बार विरोध प्रदर्शन
बिरसी हवाई अड्डे के विस्तारीकरण की शुरुआत से ही विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है. पुनर्वास परिवारों को वादे के मुताबिक मुआवजा, नौकरी पुनर्वास आदि नहीं दिया गया. इसलिए हर साल कोई ना कोई आंदोलन चलता ही रहता है. दो साल पहले भी सुरक्षा गार्डों का आंदोलन काफी लंबा चला था. आखिरकार केंद्र सरकार को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा.






