सिविल लाइन बोडी से बदबू

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दुर्गंध से क्षेत्रवासी परेशान : सफाई व्यवस्था पर नप की अनदेखी
गोंदिया. शहर के सौंदर्यीकरण की दृष्टि से सिविल लाइन स्थित बोडी का सौंदर्यीकरण किया गया. जिससे क्षेत्र की खूबसूरती और भी बढ़ गई. बोडी क्षेत्र में आने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ी है. सुबह और शाम के समय बड़ी संख्या में नागरिक अपने बच्चों के साथ इस स्थान पर टहलने आते हैं. लेकिन अभी की हालत में बोडी का पानी पूरी तरह से दूषित हो चुका है. जिससे पानी की दुर्गंध क्षेत्र के वातावरण को प्रदूषित कर रही है. इसका अनुभव यहां आने-जाने वाले लोगों को हो रहा है. लेकिन आश्चर्य की बात है कि नगर परिषद इस ओर ध्यान नहीं दे रही है. इस ओर तत्काल ध्यान देकर बोडी के पानी को साफ करें, ऐसी मांग नागरिकों ने की है.
शहर के सौंदर्यीकरण के लिए नगर परिषद प्रशासन की ओर से कार्य किए गए. जिससे शहर की खूबसूरती भी देखने को मिली. लेकिन सौंदर्यीकरण के नजरिए से किए जाने वाले कार्यों का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है. लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा है. इस बोडी को परिवर्तित व सुशोभित किया गया. यहां आकर्षक फव्वारे, जिले की शान सारस की प्रतिकृतियां, ‘आई लव गोंदिया’ डिजिटल बोर्ड आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं. सुबह से शाम तक बोडी में चलने वाले लोगों की भारी भीड़ रहती है. युवाओं से लेकर बूढ़ों तक बोडी इलाके में घूमने आते हैं. लेकिन, आजकल बोडी का पानी दूषित हो गया है. इसके कारण पानी से दुर्गंध आने लगी है और क्षेत्रवासियों तथा सैर के लिए आने वाले लोगों को परेशानी हो रही है. सब कुछ सही होने पर भी बदबूदार पानी से नागरिकों के स्वास्थ्य पर असर पड़ने का खतरा है. इस पर ध्यान देना जरूरी है. लेकिन नगर परिषद और पार्षदों के अपने-अपने काम में व्यस्त रहने के कारण शहर के सौंदर्यीकरण की दृष्टि से विकसित किया गया यह क्षेत्र उपेक्षित हो गया. अब नगर परिषद प्रशासक शासन के अधीन है. सिविल लाइन क्षेत्र के नागरिकों की मांग है कि वे इस मुद्दे पर ध्यान दें और बोडी के पानी को साफ करें.

लाखों की निधि से बोडी का विकास
बोडी के सौंदर्यीकरण के लिए नगर परिषद ने लाखों रु. खर्च किए हैं. जिससे बोडी की सुंदरता में वृद्धि हुई. जिससे क्षेत्र को एक अलग लुक मिला है. प्रकाश व्यवस्था, आकर्षक फव्वारा, सारस प्रतिकृति, बैठने की व्यवस्था आदि अनेक कार्य किए गए हैं. लेकिन अब जल प्रदूषण के कारण ये सभी प्रभावित हो रहे हैं. इसलिए नगर परिषद को इस ओर ध्यान देने की नितांत आवश्यकता है.

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