नवेगांव-नागझिरा व्याघ्र प्रकल्प में 73 चीतलों का सफल पुनर्वास

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73 चीतलों को सुरक्षित छोड़ने में सफलता
गोंदिया. नवेगांव-नागझिरा व्याघ्र प्रकल्प में वन्यजीव व्यवस्थापन को नई गति मिल रही है. प्रकल्प में चीतलों के व्यवस्थापन के लिए स्थलांतरण का एक जरूरी चरण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है. प्रकल्प प्रशासन की दी गई जानकारी के अनुसार, 25 नवंबर को कुल 73 चीतलों का सुरक्षित पुनर्वास किया गया. इसमें 63 नर और 10 मादा शामिल हैं. वन्यजीव व्यवस्थापन के अनुसार, चीतलों का स्थलांतरण जरूरी माना जाता है. जंगल एरिया में जानवरों की संख्या, चारे का एरिया, मौजूद पानी के स्त्रोत और परिसर पर दबाव के बीच बैलेंस बनाए रखने के लिए ऐसी पुनर्वास एक्टिविटीज की जरूरत होती है. नवेगांव-नागझिरा प्रकल्प में भी, जैसे-जैसे कुछ एरिया में चीतलों की संख्या बढ़ी, बायोडायवर्सिटी का बैलेंस बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया. चीतलों को पहले सुरक्षित रूप से पकड़ा गया और एक ट्रांजिट एनक्लोजर में निरीक्षण में रखा गया. इसके बाद उन्हें साइंटिफिक तरीके से सही जगह पर छोड़ा गया. पुरी प्रक्रिया बहुत सावधानी से की गई. इसके लिए उपसंचालक, पशु चिकित्सा अधिकारी, वनपरिक्षेत्र अधिकारी, तकनिकी कर्मचारी, स्थानीय वन कर्मचारियों की अहम भूमिका रही.

यह पहल परिसंस्था की सुरक्षा की दिशा में एक जरूरी कदम है और भविष्य में, जंगली जानवरों की भलाई के लिए ऐसे वैज्ञानिक व्यवस्थापन की पहल को प्राथमिकता दी जाएगी. जंगल बचाने, बायोडायवर्सिटी बचाने और जंगली जानवरों के लिए सुरक्षित रहने की जगह बनाने की दिशा में यह कदम निश्चित रूप से तारीफ के काबिल है.
प्रीतमसिंह कोडापे, उपसंचालक, नवेगांव-नागझिरा व्याघ्र प्रकल्प

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