गोंदिया. नगर निगम चुनाव में सहयोगी पार्टियों की नाराजगी और टिकट बंटवारे में उलझन बड़ी पार्टियों के लिए बड़ी सिरदर्दी बनती जा रही है. जो सहयोगी दल लोकसभा और विधानसभा के लिए मिलकर लड़ रहे थे, वे अब अकेले ही मैदान में उतर आए हैं. इससे स्थानीय लेवल पर समीकरण बिगड़ गए हैं और वोट बढ़ने का डर सभी पार्टियों को सता रहा है. दो नगर निगम चुनावों के मौके पर लोकल पॉलिटिक्स गरमा गई है. विधायक समेत लोकल नेताओं में वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई है और अब टिकट बंटवारे में उलझन खत्म होने के बाद लड़ाई की तस्वीर साफ हो गई है. लेकिन, ऐसा देखा जा रहा है कि विरोधी पार्टियों के बजाय सहयोगी दलों ने सभी पार्टियों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर दी है. यहां, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गट) भाजपा से दूर है और क्योंकि शिंदे सेना और कांग्रेस भी मैदान में हैं, इसलिए मुकाबला आर-पार का हो गया है. कुछ जगहों पर बहुजन समाज पार्टी ने भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं. इससे अलग-अलग वार्डों में अलग-अलग समीकरण बन गए हैं.
अंदरूनी मतभेदों की वजह से बढ़ी मुश्किलें
हर पार्टी अपने ग्रुप के लोगों को टिकट देना चाहती थी. लेकिन, वार्ड कम होने की वजह से यह दिक्कत हो गई. इसकी वजह से, यह खतरा है कि 3 उम्मीदवार पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी से प्रभावित होंगे. कुछ नाराज लोग इंडिपेंडेंट के तौर पर मैदान में उतरेंगे, जबकि दूसरे उम्मीदवार को तब भी कमजोर करने की कोशिश करेंगे जब वे मैदान में नहीं होंगे.






