तीन घंटे के रेस्क्यू के बाद दो वर्ष की मादा तेंदुआ पिंजरे में कैद

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गोंदिया. अर्जुनी मोरगांव तहसील के पिंपलगांव-खांबी में गुरुवार, 18 जून की सुबह करीब 5.30 बजे कुछ नागरिकों ने गांव के स्कूल परिसर में एक तेंदुए को देखा. तेंदुआ दिखते ही नागरिक शोर मचाते हुए वहां से भाग निकले. कुछ ही देर बाद पता चला कि वह लांजेवार के घर में घुस गया है. घर के सदस्यों ने अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी दरवाजे बंद कर लिए. जैसे ही तेंदुए की खबर गांव में हवा की तरह फैली, ग्रामीणों की भीड़ लांजेवार के घर पर उमड़ पड़ी. लेकिन भीड़ का फायदा उठाकर तेंदूआ फिर वहां से भाग निकला. फिर उसे बोरकर के घर के पास शौचालय क्षेत्र में देखा गया. इसी दौरान वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया. इसके बाद तेंदुआ को मेश्राम के घर के पास एक जर्जर घर परिसर में देखा गया. वन विभाग ने उस जगह पर रेस्क्यू करने की कोशिश की, लेकिन तेंदुआ फिर भागने में कामयाब हो गया. इससे गांव में कुछ देर के लिए तनाव का माहौल बन गया. वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए क्षेत्र में जाल और अन्य आवश्यक सामग्री तैनात की है. लेकिन तेंदूआ फिर वहां से भाग निकला और होमराज मेंढे के घर की ओर चला गया. आखिरकार वन विभाग के लगातार प्रयास के बाद करीब तीन घंटे बाद तेंदुए को सुरक्षित पकड़ लिया गया.
वन अधिकारियों के अनुसार, पकड़ा गया तेंदुआ करीब दो साल की मादा है और उसकी हालत ठीक है. आवश्यक चिकित्सीय परीक्षण के बाद उसे उचित निवास स्थान पर छोड़ने की प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी. इस बीच, तेंदुए को देखने के लिए पिंपलगांव-खांबी और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में नागरिक एकत्र हो गए. कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अर्जुनी मोरगांव थाने के थानेदार कमलेश सोनटक्के अपनी टीम के साथ मौके पर मौजूद थे. इस रेस्क्यू अभियान में नवेगांवबांध वनपरिक्षेत्र अधिकारी मारबते, सहायक वनसंरक्षक अविनाश मेश्राम, बाराभाटी बीट के चांदेवार, आरआरटी गोंदिया टीम, नवेगांवबांध रेस्क्यू टीम के सतीश शेंदरे, अमोल चौबे, विक्रांत ब्राह्मणकर, अमित राऊत, राजेश ढोक व बाराभाटी के चिकित्सा अधिकारी डा. बोकडे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

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