गोंदिया : पिछले 3-4 सालों से सरकार सरकारी कार्यों का भुगतान अटकाए हुए है. नतीजतन, ठेकेदार कर्ज के बोझ तले दब गए हैं. इसलिए, ठेकेदारों का आरोप है कि बिलों का भुगतान न होने के कारण ठेकेदार अशोक फुंडे की मृत्यु हो गई. पिछले 3 सालों से रोगायो के तहत किए गए कुशल कार्यों के लिए उपलब्ध कराई गई सामग्री का पैसा नहीं मिला है, जिससे लगातार आर्थिक तंगी के कारण आमगांव तहसील के ग्राम डोंगरगांव निवासी ठेकेदार अशोक शंकरराव फुंडे की भी मृत्यु हो गई. यह भी आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार भुगतान रोककर ठेकेदारों की जान जोखिम में डाल रही है. पिछले तीन सालों से मनरेगा योजना के तहत कुशल कार्यों का भुगतान सरकार के पास अटका हुआ है. सरकार ने सिस्टम में निधि नहीं भेजी है. इसलिए, ठेकेदार निधि के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं. कर्ज में डूबे ठेकेदार गंभीर आर्थिक संकट में हैं. आमगांव तहसील के ठेकेदार अशोक फुंडे पर पिछले तीन वर्षों से बकाया था. इस वजह से वह लगातार चिंतित रहते थे और दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई. ठेकेदारों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आरोप लगाया है कि राज्य सरकार का तुगलकी प्रशासन इसके लिए जिम्मेदार है. राज्य सरकार किए गए कार्यों के बकाया को चुकाने के लिए निधि के वितरण में भी आधी-अधूरी भूमिका अपना रही है. कुछ को भुगतान किया गया है जबकि कुछ ठेकेदारों का पैसा सुविधाजनक रूप से रोक दिया गया है. आरोप लगाया गया है कि कर्ज के बोझ तले दबे ठेकेदार अप्रत्यक्ष रूप से हर साल मृत्यु का सामना कर रहे हैं. आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ठेकेदार सिद्धार्थ डोंगरे, राजू नायडू, केदार येडे, अतुल चौहान, रणजीत पटेल, आफताब कुरैशी, राजू शेंडे, डॉ. हरिनखेड़े, मेंढे, राजू चचाने, उमेंद्र खोब्रागडे, संजू देशकर, धर्मराज पाथोड़े आदि उपस्थित थे.
बिलों का भुगतान न होने से ठेकेदार फुंडे की मृत्यु, ठेकेदारों ने लगाया आरोप
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