Thursday, April 23, 2026
Google search engine
HomeUncategorizedविपक्ष की महिला विरोधी मानसिकता उजागर, पीठ में घोंपा खंजर, विपक्षी दलों...

विपक्ष की महिला विरोधी मानसिकता उजागर, पीठ में घोंपा खंजर, विपक्षी दलों पर बरसे विधायक विनोद अग्रवाल और जिलाध्यक्ष सीता रहांगडाले

​गोंदिया: संसद में हाल ही में हुई चर्चा के दौरान कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके जैसे दलों ने महत्वपूर्ण विधेयकों का विरोध कर देश की आधी आबादी यानी महिलाओं के साथ विश्वासघात किया है। इन दलों ने न केवल विधेयकों का विरोध किया, बल्कि भारत की लाखों माताओं, बहनों और बेटियों की पीठ में खंजर घोंपा है। उनकी महिला विरोधी मानसिकता अब पूरी तरह उजागर हो गई है। यह तीखा हमला भाजपा विधायक विनोद अग्रवाल और भाजपा जिलाध्यक्ष सीताताई रहांगडाले ने किया। वे आज 23 अप्रैल को शासकीय विश्राम गृह, गोंदिया में आयोजित पत्रकार वार्ता में बोल रहे थे।
​इस अवसर पर जिला महामंत्री पंकज रहांगडाले, नरेंद्र बाजपेयी, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष तुमेश्वरी बघेले, रचना गहाणे, जयंत शुक्ला, भावना कदम, धर्मिष्ठा सेंगर, चैताली नागपुरे, जि.प. सदस्य माधुरी रहांगडाले, पार्षद मैथुला बिसेन, एड. सरिता कुलकर्णी, नेहा नायक, संगीता देशमुख, शालिनी डोंगरे, शुभा भारद्वाज सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
​पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए विधायक विनोद अग्रवाल और जिलाध्यक्ष सीता रहांगडाले ने बताया कि 16 और 17 अप्रैल को संसद में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन (निर्वाचन क्षेत्र पुनर्गठन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक पर हुई चर्चा देश के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए ऐतिहासिक थी। हालांकि, कांग्रेस और उनके सहयोगी दलों ने इसका विरोध कर सामाजिक प्रगति का गला घोंटा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बार-बार स्पष्ट किया है कि नीति निर्धारण में महिलाओं को हिस्सेदारी देना कोई एहसान नहीं बल्कि उनका प्राकृतिक अधिकार है। फिर भी, संकुचित राजनीतिक स्वार्थ के कारण ये दल महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रख रहे हैं।
​केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सदन में विपक्ष के हर झूठे मुद्दे को खारिज किया है। ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ के सिद्धांत को लागू करना ही इन विधेयकों का मुख्य उद्देश्य है। डीएमके और अन्य दलों द्वारा यह झूठा प्रचार किया जा रहा है कि निर्वाचन क्षेत्र के पुनर्गठन से दक्षिण भारत को नुकसान होगा। वास्तव में, इससे किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा; बल्कि दक्षिण भारत का आनुपातिक प्रतिनिधित्व सुरक्षित किया जाएगा और उसे बढ़ाया जाएगा, ऐसा गृहमंत्री ने तथ्यों के साथ स्पष्ट किया है।
​भाजपा ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी जैसे दल केवल तुष्टीकरण और प्रक्रिया में देरी करने के लिए महिला आरक्षण में धर्म-आधारित आरक्षण की असंवैधानिक मांग कर रहे हैं, जिसे भारत का संविधान स्पष्ट रूप से खारिज करता है। साथ ही, ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को चुनाव के डर से समर्थन देने वाले इन दलों ने वास्तव में कार्यान्वयन के समय बाधा उत्पन्न की है। शाहबानो मामले और तीन तलाक के समय महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ खड़े होने वाले ये दल कभी भी महिलाओं को समान प्रतिनिधित्व नहीं दे सकते।
​आज देश की महिलाएं केवल दर्शक नहीं रहीं, बल्कि वे राष्ट्र निर्माण में सक्रिय हैं। पंचायत स्तर पर सफल नेतृत्व करने वाली लाखों महिलाएं अब संसद और विधानसभा में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। इस ऐतिहासिक अवसर में देरी करने वाले अहंकारी दलों को आगामी चुनावों में महिलाओं के तीव्र रोष का सामना करना पड़ेगा और महिलाएं अपने वोट की शक्ति से उन्हें राजनीति से बाहर कर देंगी, ऐसी चेतावनी भी इस दौरान दी गई।
​भारतीय जनता पार्टी महिला सशक्तिकरण और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और महिलाओं को उनका अधिकार मिलने तक इन महिला विरोधी ताकतों के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगी, ऐसा इस अवसर पर दृढ़ता के साथ कहा गया।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img
- Advertisment -spot_img
- Advertisment -spot_img
- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments